आदिवासी समुदाय ने मंगलसूत्र अंगीकार किया

 
Sep 07, 01:29 pm

इटानगर। अरुणाचल प्रदेश में एक आदिवासी समुदाय ने विवाहिताओं के लिए मंगलसूत्र के समान एक हार पहनना अनिवार्य कर दिया है, ताकि लोगों के समक्ष उनकी वैवाहिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

न्यीशी जनजाति के आब तेब और आटो लप्पा समुदायों ने फरवरी में एक सम्मेलन में फैसला किया था कि शादी संपन्न करने के लिए दुल्हे की ओर से दुल्हन को जेनजप भेंट करना अनिवार्य होगा। आब तेब और आटो लप्पा वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष ताबा हारे ने कहा कि सम्मेलन में हमने फैसला किया कि जब तक दूल्हा अपनी दुल्हन को जेनजप नहीं देगा तब तक शादी संपन्न नहीं होगी। नजदीकी रिश्तेदार भी उस समय तक दुल्हन को मान्यता नहीं देंगे जब तक कि दुल्हन उसे पहनने पर सहमत नहीं हो जाती।

माना जा रहा है कि यह कदम बहुपतित्व प्रथा की घटनाओं को रोकने के लिए है। उल्लेखनीय है कि समुदाय में इस व्यवस्था पर रोक है। हारे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर किसी व्यक्ति की एक से अधिक पत्नी है तो उसे प्रत्येक पत्नी को जेनजप देना चाहिए। लेकिन हारे ने इस बात से इंकार किया कि वे मैदानी क्षेत्रों के लोगों के रिवाज अपनाकर आदिवासी समुदाय में कोई नई परंपरा शुरू कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे सिर्फ प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित कर रहे हैं। हारे ने कहा कि हमारे यहां परंपरा रही है कि सास नवविवाहिता दुल्हन को महंगे हार देती हैं। लेकिन वे परंपराएं भुला दी गई या वे जारी नहीं रह सकीं। उन्होंने कहा कि हम मंगलसूत्र की तरह हार के डिजायन में कुछ सुधार के साथ उन्हें फिर से शुरू कर रहे हैं। इन दोनों समुदायों की आबादी करीब 20 हजार है और वे असम के कुछ हिस्सों के अलावा सियांग सुबानसिरी और कामेंग नदियों के पास रहते हैं।




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