
नई दिल्ली। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने देशभर में प्रस्तावित 14 विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में सरकार से हस्तक्षेप नहीं करने की सिफारिश की है।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूजीसी] को भेजी सिफारिशों में कुलपतियों की नियुक्ति में हस्तक्षेप नहीं करने तथा प्रस्तावित विश्वविद्यालय में फीस निर्धारित करने में विश्वविद्यालय अधिकारियों को स्वायत्तता प्रदान करने की बात कही है। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग [एनकेसी] इस संबंध में एक पत्र यूजीसी को भेजा है जिसमें इन संस्थाओं के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया है।
गौरतलब है कि यूजीसी इन प्रस्तावित विश्वविद्यालय का खाका तैयार कर रही है। सरकार ने पुणे, कोलकाता, कोयंबटूर, मैसूर, विशाखापत्तनम, गांधीनगर, जयपुर, पटना, भोपाल, कोच्चि, अमृतसर, भुवनेश्वर, गुवाहाटी तथा ग्रेटर नोएडा में विश्वस्तर का केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय किया है।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने अपने सुझाव में कहा कि इन संस्थाओं को छात्रों की फीस तय करने की स्वायत्तता दी जानी चाहिए। इन्हें उद्योग समूहों तथा विदेशी माध्यमों से धन जुटाने का अधिकार भी दी जानी चाहिए। आयोग ने कहा कि इसके अलावा विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों तथा नेटवर्क का उपयोग धन जुटाने के लिए करना चाहिए। आयोग ने अपनी सिफारिशों में कहा कि विश्वविद्यालयों को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि आवेदक के फीस भुगतान करने की समर्थता और असमर्थता उसके नामांकन संबंधी निर्णय को प्रभावित न करे।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के प्रमुख सैम पित्रोदा ने इन संस्थाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृति, मुफ्त, शिक्षा तथा पुरस्कार देने की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया है। आयोग ने इन संस्थानों के पाठ्यक्रमों की समीक्षा करने तथा उसे वर्तमान समय की जरूरतों के अनुकूल बनाने का भी सुझाव दिया है। पाठ्यक्रम की समीक्षा नहीं करने वाले विश्वविद्यालयों से इसका कारण पूछा जाएगा।