नई दिल्ली। छह वर्षो की कानूनी लड़ाई के बाद भारतीय विदेश सेवा के एक बर्खास्त अधिकारी को दोबारा बहाल होने में सफलता मिली।
भारतीय विदेश सेवा के वर्ष 1999 बैच के अधिकारी महावीर सी सिंघवी को पेशेवर दुर्व्यवहार के आरोप में सेवा से मुक्त कर दिया गया था सिंघवी ने केंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण [कैट] के उन्हें बर्खास्त करने के आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। वर्ष 2003 में कैट ने बहाल करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति मनमोहन सरीन और न्यायमूर्ति सुदर्शन के मिश्रा की खंडपीठ ने हाल में अपने एक आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई विभागीय जांच नहीं की गई। सिंघवी को कोई अवसर दिए बिना किसी औपचारिक जंाच के बर्खास्त कर दिया गया। सिंघवी का बेहतरीन अकादमिक करियर है।
सिंघवी को सितंबर वर्ष 1999 में नियुक्त किया गया था। एक याचिका में सिंघवी ने कहा था कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने गलत तरीकों से उनकी छवि खराब करते हुए अनुशासनहीन बताया और उनके खिलाफ गैर कानूनी रूप से वर्ष 2002 में सेवामुक्ती का आदेश जारी कर दिया। अदालत ने विदेश मंत्रालय की इस बात को भी खारिज कर दिया कि विभाग को सिंघवी के खिलाफ एक महिला से शिकायत मिली थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सिंघवी जब सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते थे तब उन्होने इस महिला से विवाह का वादा किया था। लेकिन विदेश सेवा में चयनित होने के बाद वह इससे मुकर गए।
अदालत ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि सिंघवी अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाते थे। अदालत ने सिंघवी के इस तर्क को स्वीकार किया कि उन पर झूठे आरोप लगाए गए।