एचएसजीपीसी के लिए अल्टीमेटम

 
Sep 07, 10:13 pm

करनाल। हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने की मांग पर विभिन्न राज्यों की प्रबंधक कमेटियों ने भी मुहर लगा दी है। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने प्रदेश सरकार को 30 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि निर्धारित समय तक उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई तो वह स्वयं अलग कमेटी का गठन करने से गुरेज नहीं करेंगे। इसके बाद प्रदेश के सभी गुरुद्वारों से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का संचालन हटा दिया जाएगा और एचएसजीपीसी गुरुद्वारों का संचालन करेगी।

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने रविवार को करनाल के डेरा कार सेवा में आयोजित विशाल जनसभा के बाद यह फैसला लिया है। जनसभा में पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के गुरुद्वारों के प्रधान और कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। सिख नेताओं ने प्रदेश में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मांग को जायज ठहराते हुए सहमति की मुहर लगाने का काम किया। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग को अति शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। वक्ताओं ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिरोमणि अकाली दल बादल से हरियाणा के सिखों के धार्मिक मामले में दखलंदाजी न करने की हिदायत दी है।

अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि राजनीति से कोई धर्म नहीं चलता। अकाली दल बादल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को अपनी जागीर बना लिया है। भाजपा व कांग्रेस ने हमेशा सिखों में फूट डालने का काम किया है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी प्रकाश सिंह बादल और अवतार सिंह मक्कड़ की बातों में आकर गुमराह हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के सिखों की मांग जायज है और प्रदेश सरकार को इसे जल्द ही पूरा कर चुनावी वायदा निभाना चाहिए।

दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह सरना ने कहा कि पंजाब की बादल सरकार हरियाणा के सिख संगत को दो फाड़ करने की कोशिश कर रही है। प्रदेश के कुछ स्वार्थी लोग भी इसके पक्ष में नहीं है, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह हरियाणा में रहते हैं न कि पंजाब में। जब अन्य प्रदेशों की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बन सकती है तो हरियाणा की क्यों नहीं। पंजाब में बादल सरकार और कांग्रेस सरकार को इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए। यदि सिखों के धार्मिक मामले में राजनीति होती है तो 1966 की धारा 72 के अनुसार हरियाणा की सिख संगत अलग कमेटी बनाने का अधिकार है। अकाली दल 1920 के प्रधान रविंद्र सिंह, हिमाचल प्रदेश के प्रधान डा. तेजिंद्र सिंह, अकाल तख्त के पूर्व प्रधान जसबीर सिंह रोड़े, गुरुद्वारा मस्ताना साहिब लुधियाना से संत शमशेर सिंह जगीरा, गुरमीत सिंह भट्ठी उत्तर प्रदेश, बीबी वीरेंद्र कौर अजराना, मलकीत सिंह खोसा सिरसा, दीदार सिंह नलवी कुरुक्षेत्र, भाकियू नेता घासी राम नैन और भाकियू टिकैत के प्रदेश प्रधान गुरनाम सिंह ने भी प्रदेश की कांग्रेस सरकार से अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने की पुरजोर मांग की। जनसभा को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा, उपप्रधान नबाब सिंह सिंघड़ा, स. जोगा सिंह यमुनानगर, बलविंद्र सिंह खालसा ने भी संबोधित किया। इस मौके पर कमेटी पदाधिकारी हरप्रीत सिंह, बूटा सिंह, हरभजन सिंह, इंद्रपाल सिंह, रतन सिंह व बलदेव सिंह मौजूद रहे।




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