नई दिल्ली। श्रीलंका में चलाई जा रही सैन्य कार्रवाई के दौरान निहत्थे तमिल नागरिकों के मारे जाने की घटनाओं के बीच भारत ने सोमवार को अपनी गंभीर चिंता व नाखुशी व्यक्त की। उसने श्रीलंका सरकार से अत्यधिक संयम बरतने को कहा।
दरअसल, श्रीलंका में तमिलों के मारे जाने पर भारत के तमिलनाडु में प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक थी। वहां यह मुद्दा गरम होता जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार [एनएसए] एम के नारायणन ने श्रीलंका के उप उच्चायुक्त जीजीएडी पालिथागानेगोडा को भारत की चिंता से अवगत कराने के लिए बुलाया।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में उत्तरी श्रीलंका में चल रही सैन्य कार्रवाई में निहत्थे तमिल नागरिकों के मारे जाने पर चिंता व अप्रसन्नता प्रकट की गई।
एनएसए की इस पहल से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को आश्वस्त किया था कि उनकी सरकार श्रीलंका में तमिलों के 'नरसंहार' को रोकने के लिए हर कदम उठाएगी।
चेन्नई में तमिलनाडु सरकार की एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने करुणानिधि को फोन किया था। टेलीफोन वार्ता के दौरान करुणानिधि ने श्रीलंका में तमिलों के नरसंहार का मुद्दा उठाया था।
उन्होंने प्रधानमंत्री से दिल्ली स्थित श्रीलंका उच्चायोग से इस मामले में कड़ा विरोध प्रकट करने का आग्रह किया था। एनएसए की इस पहल को प्रधानमंत्री के इस आश्वासन के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के वक्तव्य के अनुसार श्रीलंका सरकार से अत्यधिक संयम बरतने व अल्पसंख्यक समुदाय में बढ़ रही असुरक्षा की भावना को दूर करने के लिए कहा गया। बयान में बिगड़ रही मानवीय हालत को सुधारने व राजनीतिक प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने की जरूरत भी प्रकट की गई।
इतना ही नहीं, भारतीय मछुआरों पर जारी हमलों के प्रति भी गंभीर चिंता जताई गई। हाल ही में 27 व 28 सितंबर को ऐसी घटनाएं हुई थीं। श्रीलंकाई राजनयिक का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया गया कि यह भारत और श्रीलंका के बीच बनी सहमति के अनुकूल नहीं है। भारत ने कहा कि श्रीलंका की नौसेना को प्रभावित परिवारों के दैनिक जीवन से जुडे़ बुनियादी मुद्दों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।