
गुवाहाटी। बोडो विद्रोहियों और बांग्लादेशी विस्थापितों के बीच जारी हिंसा ने असम के चिरांग जिले को भी अपनी चपेट में ले लिया है। तीन जिलों में 11 लोग और मारे गए हैं। इस तरह पांच दिनों के दौरान 41 लोग मारे जा चुके हैं। सरकार ने हिंसा को गैर आदिवासियों के सफाये की साजिश का हिस्सा बताया है। केंद्र ने हालात पर काबू के लिए अर्द्ध सैन्य के 1400 जवानों को असम के लिए रवाना कर दिया है।
उदालगुड़ी और दरांग के बाद हिंसा की चपेट में आए चिरांग जिले में उपद्रवियों ने गर्भवती महिला सहित दो लोगों की हत्या कर दी। इसको लेकर बोड़ो प्रदर्शकारियों ने सोमवार को नेशनल हाईवे जाम कर दिया। दो समुदायों में हिंसक झड़पों की शुरुआत सबसे पहले उदालगुड़ी और दरांग जिले में हुई। इस संघर्ष ने 25 साल पुराने नेली जनसंहार जैसा भयावह मंजर दिखा दिया है। लाशों के मिलने का सिलसिला गुरुवार को शुरू हुआ तो अभी तक थमा नहीं है। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बताया है कि पांच दिनों के दौरान मारे गए 41 लोगों में 15 पुलिस की गोली का शिकार हुए हैं। उन्होंने बताया कि उपद्रवियों ने अब तक पांच सौ से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया है। एक लाख से अधिक लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में बीएसएफ की चार कंपनियां तैनात की जा चुकी हैं। दो कंपनियां और भेजी जा रही हैं। मुख्यमंत्री गोगोई ने बताया है कि उपद्रवग्रस्त क्षेत्रों में भीड़ पर नजर रखने के लिए हेलीकाप्टरों से गश्त की जा रही है। उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया गया है। कर्फ्यू और सेना के फ्लैग मार्च के बीच उदालगुड़ी और दरांग में हालात तनावपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में हैं। कोई नई हिंसक वारदात नहीं हुई है। असम सरकार के प्रवक्ता हिमंत विश्व शर्मा का आरोप था कि नेशनल डमोक्रेटिक फ्रंट आफ बोड़ोलैंड गैर आदिवासियों के सफाये की साजिश के तहत हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। शर्मा ने कहा है कि अगर हालात यही रहे तो संगठन के साथ संघर्ष विराम पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
दिल्ली से बताया गया है कि असम में जातीय हिंसा से निपटने के लिए केंद्र ने सोमवार को अर्द्धसैनिक बल के 1400 जवानों को रवाना किया है। केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने कहा कि वह असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के नियमित संपर्क में हैं। खुद हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं।