सिंगुर। टाटा मोटर्स की बहुप्रतीक्षित लखटकिया नैनो कार परियोजना भले ही यहां से गुजरात के साणंद चली गई है, लेकिन इसके जाने से सिंगुर में हताशा, गुस्सा और तनाव है। इस परियोजना को वापस लाने के लिए स्थानीय नागरिक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
यह भी विडंबना ही है कि जिस स्थान पर इन लोगों ने कल से यह धरना शुरू किया है, डेढ़ माह माह पहले उसी जगह बैठकर तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने किसानों को जमीन वापस दिलाए जाने के लिए टाटा मोटर्स के खिलाफ आंदोलन छेड़ कर उसे यहां से जाने पर मजबूर कर दिया था।
सिंगुर नैनो बचाओ समिति के एक सदस्य द्वारिका घोष ने कहा कि यहां के अधिकतर स्थानीय लोग सिंगुर परियोजना को वापस लाए जाने के पक्ष में हैं। यह परियोजना यहां की अर्थव्यवस्था और लोगों के लिए हितों से जुड़ी हुई है।
उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के निर्माण के लिए बहुत से लोगों ने निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी और यह राशि करोड़ों रुपये में हैं। परियोजना स्थल के आसपास के क्षेत्र में बहुत से लोगों ने चाय, शीतल पेय और अन्य सामान की बिक्री के लिए छोटी-छोटी दुकानें लगा रखी थी लेकिन वे सब अब बेरोजगार हो चुके हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने ममता बनर्जी के बहकावे में आकर जमीन के बढ़े हुए मुआवजे की राशि भी नहीं ली और अब जमीन को खेती लायक बनाने के लिए फिर से मेहनत करनी होगी। एक स्थानीय नागरिक मीरा दास ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि टाटा मोटर्स यहां से इस परियोजना को ले जाएगी। अगर हम बनर्जी और उनके लोगों के बहकावे में नहीं आते तो आज स्थितियां कुछ और होती। इससे न केवल इस क्षेत्र का विकास होता बल्कि आने वाली पीढि़यों को भी बेहतर माहौल मिलता।