
वेटिकन सिटी [रोम]। केरल के एक सुदूर गांव की नन 'सिस्टर एल्फोंसा' रविवार को भारत की पहली महिला संत बन गईं। यहां सेंट पीटर्स स्क्वायर में आयोजित एक भव्य समारोह में पोप बेनेडिक्ट-16 ने उन्हें संत की उपाधि प्रदान की।
कोंट्टायम जिले के एक गांव की सिस्टर एल्फोंसा का 1946 में महज 36 साल की उम्र में निधन हो गया था। पोप ने पवित्र बाइबिल के कुछ उद्धरण पढ़ने के बाद सिस्टर को संत घोषित कर दिया। इस समारोह का हिस्सा बनने के लिए पूरी दुनिया से करीब पांच हजार भारतीय भी यहां पहुंचे थे। इस मौके पर केंद्रीय श्रम मंत्री आस्कर फर्नाडीज की अध्यक्षता में भारत सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल भी यहां मौजूद था।
सिस्टर एल्फोंसा संत का दर्जा पाने वाली पहली भारतीय महिला और दूसरी रोमन कैथोलिक हैं। इससे पहले मुंबई के निकट वसई में पैदा हुए गोंजालो गार्सिया को 1862 में संत का दर्जा हासिल हुआ था। सिस्टर एल्फोंसा ने अपनी सारी जिंदगी लोगों की मदद करते गुजारी। दुनिया भर के चर्चो में अब प्रार्थना सभा के वक्त सिस्टर एल्फोंसा का नाम स्मरण किया जाएगा।
सात साल की उम्र में लगी यीशू से लगन
सिस्टर एल्फोंसा ने सात वर्ष की उम्र में ही प्रभु यीशू को अपना 'दिव्य जीवनसाथी' करार दे दिया था। 19 अगस्त 1910 को केरल के कोंट्टायम जिले में जन्मी सिस्टर एल्फोंसा को बपतिस्मा में अन्नकुंट्टी नाम दिया गया था।
1917 में एक दिन उन्होंने अपने दोस्तों से कहा, 'तुम लोग जानते हो आज मैं इतनी खुश क्यों हूं? मेरे हृदय में प्रभु यीशू बस गए हैं।' वेटिकन द्वारा तैयार उनकी जीवनी में कहा गया है कि 13 वर्ष की उम्र में उनके परिवार ने उनका विवाह करने का निश्चय किया। एल्फोंसा ने इसका प्रतिरोध किया। उन्होंने अत्यधिक प्रार्थनाएं करनी शुरू कर दीं। यहां तक कि इससे बचने के लिए उन्होंने अपने आप को कुरूप कर लेने का विचार भी बनाया। वर्ष 1928 में उन्हें सिस्टर एल्फोंसा का नाम मिला।
कैसे मिला संत का दर्जा
पोप बेनेडिक्ट ने 1 जून 2007 को सिस्टर एल्फोंसा के नाम को स्वीकृति प्रदान कर दी थी। उन्हें संत घोषित करने की प्रक्रिया 55 वर्ष पहले ही प्रारंभ हो गई थी। इससे पहले 1996 में पोप जान पाल द्वितीय ने उन्हें 'धन्य' घोषित किया था। कैथोलिक परंपरा में इसे 'बेटिफिकेशन' कहते हैं। पोप ने तब अपनी भारत यात्रा के दौरान सिस्टर एल्फोंसा को 'ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त कार्यकर्ता' करार दिया था। उल्लेखनीय है कि मदर टेरेसा के साथ भारत के जोसेफ वाज, फादर चवेरा कुरियाकोस और सिस्टर मारिया थेरेसा भी 'धन्य' घोषित हो चुके हैं।
पोप बेनेडिक्ट ने आज के कार्यक्रम में सिस्टर एल्फोंसा के साथ तीन अन्य लोगों स्विटजरलैंड की मारिया बेर्नार्डा बटलर, इक्वेडोर की नार्सिसा द जीसस मार्लिलो मोरान और इटली के पादरी गेटानो एरिको को संत का दर्जा प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि संत का दर्जा पाने के लिए व्यक्ति द्वारा दो चमत्कार करने की दरकार रहती है।