नई दिल्ली। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने आरोप लगाया है कि रियलिटी शो बिग बास में अश्लीलता हावी होती जा रही है और कार्यशैली में पारदर्शिता का नामोनिशान नहीं है। इसलिए उन्होंने वाइल्ड कार्ड के माध्यम से इस शो में दोबारा शामिल होने से मना कर दिया था।
गौरतलब है कि समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों ने भी इस शो में अश्लीलता की शिकायत की है। खास करके भाजपा के दिवंगत नेता के पुत्र राहुल महाजन और पायल रोहतगी के हाल के दिखाए गए अंतरंग दृश्यों के खिलाफ लोगों में काफी रोष है।
युवा कांग्रेस की मुंबई इकाई के अध्यक्ष सुनिल अहिरे ने भी इसके निर्माता एवं निदेशक के खिलाफ प्राथमिकता दर्ज कराई है। शो के पहले ही सप्ताह में ही बिग बास के हाउस से बाहर होने वाले निरुपम ने अपने ब्लाग पर लिखा है कि इस शो में अश्लीलता अपने चरम पर है और लोगों को बाहर करने वाली वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। इसमें बहुत कुछ गड़बड़ है। उनका कहना था कि मैं समझता हूं कि इस कार्यक्रम को पारिवारिक मनोरंजन के रूप में दर्शकों के समक्ष लाना जाना चाहिए था, लेकिन अफसोस की बात है कि फूहड़ भाषा और अश्लीलता इस कार्यक्रम का पर्याय बन गई है। वोटिंग प्रक्रिया से संतुष्ट होने की शर्त पर ही मैं इस शो में शामिल हो सकता हूं।
उन्होंने कहा कि जब मुझे पहली बार इस शो में शामिल होने का निमंत्रण मिला तो मैं बहुत खुश हुआ। मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया, क्योंकि अभी तक किसी भी राजनीतिज्ञ ने इस क्षेत्र में कदम नहीं रखा था जहां 24 घंटे जनता उसे देख सकती थी। इसके अलावा यह वह प्लेटफार्म था जहां से यह बताया जा सकता था कि राजनीतिज्ञ आमतौर पर वह नहीं होते जैसा कि उनके बारे में प्रचारित किया जाता है। उनके पास भी संवेदनाएं होती हैं, दिल होता है और वे परिवार के साथ समय बिताने के लिए लालायित रहते हैं। वे गा सकते हैं, खाना बना सकते हैं और तमाम तरह के रुचिकर काम कर सकते हैं। मैं समझता हूं कि इसमें शामिल होने का मेरा फैसला गलत नहीं था।
निरुपम ने शो से बाहर होते समय कहा था कि उन्हें इसलिए बाहर किया गया क्योंकि लोग उन्हें समझ नहीं पाए थे।