
नई दिल्ली। क्या सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्टो के न्यायाधीशों की संपत्ति का ब्यौरा सूचना के अधिकार के तहत आता है? इस पेचीदा सवाल पर 20 अक्टूबर को केंद्रीय सूचना आयोग की दो पूर्ण पीठ में सुनवाई होगी। आयोग ने अपनी राह आसान बनाने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें आयोग ने व्यक्तिगत और संगठनों से इस मुद्दे पर 17 अक्तूबर तक लिखित रूप से राय मांगी है।
गौरतलब है कि यह सवाल सुभाष अग्रवाल की जनहित याचिका से संबंधित है। याचिका में वर्ष 1997 में सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण अदालत की बैठक में पारित उस प्रस्ताव का हवाला दिया गया है, जिसमें न्यायाधीशों की संपत्ति की घोषणा से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। अग्रवाल ने एक अलग अनुरोध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से पूछा कि क्या उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 'सूचना का अधिकार' कानून के दायरे में आते हैं।