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आखिरकार महिला को मिली प्यार की निशानी

Oct 16, 11:07 pm
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नई दिल्ली। अपने प्यार की निशानी एक साल के बच्चे को प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही महिला को आखिरकार जीत प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने बच्चे को जन्म देने वाले उस माता-पिता को बच्चा सौंपने का निर्देश दिया जिन्होंने सामाजिक कलंक से बचने के लिए उसे दूसरे को सौंप दिया था।

बच्चे का कल्याण लगाव पर भारी पड़ा और न्यायाधीश ने बच्चे को उसके स्वाभाविक माता-पिता को सौंपे जाने का आदेश दिया। इस मामले में अदालत में जमकर ड्रामा हुआ। जहां एक तरफ मां अपने बच्चे को जोर से पकड़े हुई थी वहीं उसका एक साल से पालन करने वाली महिला रोने लगी और बाद में मू‌िर्च्छत हो गई। बच्चा भी इन सबसे अप्रभावित नहीं रहा और घटना को देख रोने लगा।

अपने प्रेमी के साथ विवाह करने के बाद महिला ने अपने बच्चे को प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की थी। बहरहाल बच्चे का पालन करने वाले अभिभावक ने उसे देने से इंकार कर दिया और कहा कि बच्चे को उन्हें दत्तक के रूप दिया गया था।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नवीन अरोड़ा ने कहा कि बच्चे का कल्याण महत्वपूर्ण है न कि भावना। अगर बच्चे को उसके स्वभाविक माता-पिता को सौंपा जाता है तो उसके लिए बेहतर होगा।

उन्होंने कहा कि इस अवस्था में प्रतिवादी की भावना पर इस आधार पर विचार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने बच्चे को एक साल तक अपने पास रखा। अदालत ने कहा कि बच्चे के अभिभावक दत्तक के लिए जरूरी शर्तो को साबित करने में विफल रहे हैं। हालांकि अदालत ने यह माना कि दोनों ने बच्चे को पूरा प्यार दिया और अच्छे तरीके से उसकी देखभाल की।

गौरतलब है कि महिला ने बच्चे को उस समय उन्हें सौंप दिया था जब वह केवल 17 दिन का था। बहरहाल महिला ने गत साल 22 नवंबर को अपने प्रेमी से शादी करने के बाद बच्चे को प्राप्त करने के लिए प्रयास शुरू किए, लेकिन उसे बच्चा सौंपने से इंकार कर दिया गया।

दंपति के वकील ने कहा कि बच्चे का जन्म गत साल 24 सितंबर को सफदरजंग अस्पताल में हुआ था। चूंकि दोनों की उस समय शादी नहीं हुई थी फलस्वरूप उन्होंने मजबूरन उन्हें तब तक के लिए बच्चे को दूसरे को सौंपने का निर्णय किया जब तक वे विवाहित नहीं हो जाते।

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