हथिनी ने कहा, शुक्रिया गांववालों

 
Nov 21, 12:34 pm

मुरी [रांची], [रतन गुप्ता]। 'मां असंभव तेरे अपार प्यार का शब्दों में व्यक्त होना।' बागमुंडी थाने के पेड़ेतोड़ांग गांव में बृहस्पतिवार रात मां के ममत्व की 'आकाश व्यापकता' फिर सिद्ध हुई। बेजुबां हथिनी बच्चे के वियोग में इस कदर द्रवित हुई कि चिघाड़ती रही। पहले मदद को सहयोगी गजराजों से गुहार लगाई, बात नहीं बनी तो 'मानुष' का आसरा लगाया। सूंड़ उठाकर गांववालों को बुलाया। ग्रामीणों ने दिन-रात हथिनी के साथ रतजगा किया और दूधमुंहे गजराज को कुएं से निकालकर दम लिया। बच्चे से मिल हथिनी की आंखों से अविरल अश्रु बहते रहे। मानो मां की ममता का ज्वार फूट पड़ा हो।

हुआ यूं कि 14 हाथियों का झुंड पेड़तोड़ांग हो जा रहा था। इसी बीच इनमें एक बच्चा कुएं में गिर गया। सभी हाथी पूरी रात वहां पर जमे रहे। यह जानकारी होते ही आसपास के ग्रामीण जुटने लगे किंतु सुबह होते ही गजशावक की मां को छोड़ सभी हाथी जंगल में चले गए। मां की ममता ने उसे रोके रखा। हथिनी ने अपनी सूंड़ से बच्चे को बाहर निकालने का लगातार प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुई। इसी बीच सूचना पाकर डीएफओ के बालामुरूगन भी अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। जब हथिनी अपने बच्चे को नहीं निकाल सकी तो वह कुएं से दो सौ मीटर दूर जाकर खड़ी हो गई। वह रह-रहकर चिंघाड़ती रही। बाद में ग्रामीणों ने कुएं को पुआल आदि से भरना शुरू कर दिया। बीच-बीच में हथिनी कुएं के पास आकर अपने बच्चे को देख जाती थी। जब कुआं भर गया, तो ग्रामीण वहां से भाग गए और हथिनी अपने बच्चे को लेकर जंगल की ओर रवाना हो गई।




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