
शिमला, [रचना गुप्ता]। नटखट कन्हैया वर और राधाजी वधू, और बारात में पूरा शिमला। चौंकिए नहीं, यह शादी बेशक देवताओं की है लेकिन बारात में मनुष्य ही बाराती होंगे। आस्था और धार्मिक रुचि की यह बानगी शिमला में देखने को मिलेगी। मुजफ्फरनगर का बैंड व सहारनपुर की आतिशबाजी फिजां में ऐसे रंग बिखेरेगे कि देखने वाले दंग रह जाएं। खाने के एक से बढ़कर एक व्यंजन होंगे। देवभूमि हिमाचल में 22 नवंबर की रात पहाड़ों पर ऐसी खूबसूरत छटा बिखरेगी, जो द्वारिका व वृंदावन में भी शायद न दिखती हो। मौका होगा द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण से राधाजी की मुलाकात का। राधाजी मुंबई से आ रही हैं। शिमला में दोनों का विवाह समारोह रखा गया है। अनुमान के मुताबिक करीब सात हजार बाराती होंगे। देशभर से संत अनुष्ठान करवाने आ रहे है।
राधाजी का मोतियों व कुंदन से जड़ा लिबास व सुहाग का चूड़ा, वृंदावन से आ रहा है जबकि शिमला के माल रोड के मशहूर सुनार सत्या ज्वैलर्स ने सोने में जड़ाऊ मोतियों वाला हार बनाया है। श्रीकृष्ण व राधा के विवाह के लिए एक या दो परिवार ही तैयारियों में नहीं जुटे है बल्कि कई स्थानीय व्यापारी आयोजन में योगदान दे रहे है। कोई खानपान का स्टॉल लगाएगा तो कोई ठहरने की व्यवस्था करवा रहा है।
दरअसल, शिमला में प्राचीन गंज मंदिर राधा-कृष्ण का है। इसमें करीब 25 वर्ष पूर्व स्थानीय निवासी गोपाल अग्रवाल ने श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापना की थी। उधर, मुंबई में भी दीप माला परिवार ने राधाजी की मूर्ति स्थापना बेटी के रूप में की थी। दोनों परिवारों ने इनका विवाह आयोजित करने पर विचार किया। दीपमाला परिवार भी अग्रवाल परिवार की तरह धार्मिक प्रवृत्ति का है जो लगातार धार्मिक यात्राओं पर ही रहता है। यात्राओं के इसी सिलसिले में दीपमाला परिवार शिमला भी आया था। रोचक बात यह है कि 'वर पक्ष' और 'वधू पक्ष' में बातचीत भी ठीक उसी तर्ज पर चली जैसे दो परिवार अपने बच्चों का रिश्ता जोड़ते हैं। बस उसी बातचीत के परिपक्व होने का प्रमाण है कि अब शादी का दिन भी तय हो गया है।
विवाह का मुहूर्त 21 व 22 नवंबर का निकला है। इसमें शिमला के कई लोगों ने स्वेच्छा से इंतजाम किया है। शुक्रवार को राम मंदिर शिमला में जगाधरी से कीर्तन मंडली आएगी व पंजाब से खास तौर पर महिला संगीत के लिए टोली आ रही है। वृंदावन से मेहंदी की रस्म अदा करने वाले आएंगे। वधू [राधा] पक्ष वाले भी मुंबई से पहुंच चुके है।
संतों व भक्तों की ओर से जो निमंत्रण दिया गया है उसमें कन्हैया को बड़ी सरकार व राधा रानी को अलबेली सरकार बताते हुए आम लोगों को आशीर्वाद देने के लिए बुलाया गया है। विवाह का कार्ड भी काफी रोचक व महंगा बना है। मुजफ्फरनगर का बैंड सुरीली धुनों पर शिमला का वातावरण भक्तिमय करेगा। बारात पूरे शिमला से निकलती हुई पांच घंटे बाद श्रीराम मंदिर पहुंचेगी। मशहूर बालजीज रेस्तरां बूंदी के लड्डू बांटेगा व चाट, पूरी की भी व्यवस्था रहेगी। वधू प्रवेश 23 नवंबर की सुबह 8 बजे होगा। मुंबई से आई राधा की प्रतिमा शिमला के सनातन मंदिर में कृष्ण के साथ स्थापित हो जाएगी।
श्री ब्रह्मा ने कराया था राधा-कृष्ण का विवाह
-श्रीकृष्ण व रुकमणि के विवाह का ही सामान्यत: जिक्र रहा है, लेकिन पुराणों में वर्णन है कि राधा का विवाह भी श्री ब्रह्मा ने श्रीकृष्ण से करवाया था। जिस तरह तुलसी का विवाह विष्णु से करवाने की परंपरा रही है, वैसे ही लोग आत्म शांति व विश्व कल्याण के लिए राधा-कृष्ण का विवाह भी करवाते है। ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर मस्तराम का कहना है कि जिस तरह जीव, ब्रह्म में समाता है उसी तरह मानव इंद्रियों की गोपियों व हृदय की श्रीकृष्ण से तुलना हुई है। राधा का मिलन भी इन्हीं में से एक है। लोग राधा, कृष्ण के विवाह की मान्यता को पूरा जग कल्याण के लिए करते है। पुरानों में इस तरह के आयोजनों को शुभ माना गया है।