मसूरी, जागरण संवाददाता। सपने उन्हीं के सच होते हैं, जो इन्हें हकीकत में बदलने का जज्बा रखते हैं और इसके लिए जरूरी है हौसला। ये पंक्तियां जौनपुर के मैड गांव के विक्रम दास पर सटीक बैठती हैं। मजदूर पिता के बेटे विक्रम ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई कर अपने जीवन में प्रकाश बिखेरा है। विक्रम का चयन पीसीएस अधिकारी के रूप में हुआ है।
विक्रम के पिता बच्चनदास अपने गांव मैड पट्टी दशजूला में मजदूरी कर परिवार पालते है। विक्रम ने इंटर तक की पढ़ाई गांव में ही की। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते विक्रम ने इंटर में विज्ञान को छोड़कर कला वर्ग में पढ़ाई की। इसके बाद विक्रम ने देहरादून डीएवी कालेज से बीए प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। समाजशास्त्र से एमए करने के बाद विक्रम ने पीसीएस की तैयारी शुरू की और बिना कोचिंग के ही पीसीएस परीक्षा में सफल हुए। विक्रम दास ने गांव के स्कूल में बतौर शिक्षामित्र कार्य करते हुए तैयारी के लिए किताबें जुटाई। विक्रम का गांव मैड अभी भी बिजली की रोशनी से महरूम है। विक्रम ने एक छोटे से कमरे में लालटेन की रोशनी में पीसीएस की तैयारी की। विक्रम ने वर्ष 2002 में भी पीसीएस की परीक्षा दी थी, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद वर्ष 2004 में उन्होंने फिर परीक्षा दी।
विक्रम का चयन बतौर सहायक योजना अधिकारी हुआ है। विक्रम की सफलता पर उसके माता-पिता व पत्नी काफी खुश हैं। अनुसूचित जाति व गरीब परिवार में पैदा हुए विक्रम कहते हैं कि पीसीएस की तैयारी के लिए उसे स्कूल के मुखिया गिरीश पाटनी ने प्रेरित किया। विक्रम का मानना है कि मेहनत से मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान हो जाता है। विक्रम ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के लिए वह रोजाना लगभग 12 घंटे पढ़ाई करता था। विक्रम के घर में होली व दीवाली जैसा माहौल बना हुआ है।