
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अघोषित कर्फ्यू से श्रीनगर और इसके आसपास के इलाकों में शुक्रवार को जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। हालांकि कर्फ्यू को लेकर संशय और उलझन की स्थिति भी बनी रही।
पुलिस नियंत्रण कक्ष [पीसीआर] के एक अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर और इसके आसपास के इलाकों समेत घाटी के किसी भी हिस्से में कर्फ्यू नहीं लगाया गया है, लेकिन जमीनी स्थिति बिल्कुल अलग है क्योंकि हर दस फुट की दूरी पर सीआरपीएफ के जवान स्वचालित हथियारों के साथ तैनात है। समाचार एजेंसी के संवाददाता को अपने घर से कार्यालय तक जाने के दौरान सीआरपीएफ के जवानों ने रास्ते में चार स्थानों पर रोका और पहचान पत्र की जांच के बाद उसे आगे जाने दिया गया। नातीपुरा मोड़ और रामबाग में इस संवाददाता से सीआरपीएफ के एक जवान ने कहा कि आज तड़के चार बजे से कर्फ्यू लागू किया गया है। उसने कहा कि चुनाव ड्यूटी कार्ड समेत वैध सरकारी पास के बिना किसी को भी जाने नहीं देने के सख्त निर्देश है।
इसी तरह की रिपोर्ट अन्य स्थानों से भी प्राप्त हुई है जहां लोगों को कर्फ्यू पाबंदी के कारण कही जाने की अनुमति नहीं दी गई। रेनावारी में सुबह लोगों को शहर में कर्फ्यू लगाए जाने के बारे में बताया गया, हालांकि दिन चढ़ते-चढ़ते लोगो ने अपने घरों से निकलकर आना जाना शुरू कर दिया और कुछ दुकानें भी खुली। हालांकि 11 बजे क्षेत्र के एक पुलिस अधिकारी ने दुकानदारों को दुकानें बंद करने के निर्देश दिए।
मैसुमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। मैसुमा में ही जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का मुख्यालय स्थित है। निचले शहर में लोगों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने उन्हें आवश्यक वस्तुएं नहीं खरीदने दी। शहर और उसके आसपास के इलाकों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों से यातायात नदारद रहा।
इस बीच कश्मीर में चुनाव विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। समन्वय समिति ने लोगों से शुक्रवार की नमाज के बाद अपने संबंधित इलाकों में प्रदर्शन करने की अपील की है।