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पर्दे पर धूम्रपान जनता के लिए नुकसानदेह

Nov 21, 08:37 pm
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नई दिल्ली। फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों में धूम्रपान के दृश्यों पर पूर्ण प्रतिबंध को जायज ठहराते हुए केंद्र ने आज दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दावा किया कि पर्दे पर धूम्रपान दिखाना जनहित के खिलाफ है क्योंकि लोग सितारों के काम की नकल करते हैं।

अतिरिक्त सालिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा और वकील मुकुल गुप्ता ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग यह देखकर प्रभावित होते हैं कि उनके सितारे फिल्मों या विज्ञापनों में क्या कर रहे हैं। लोग उनकी नकल शुरू कर देते हैं। अगर वे फिल्म अभिनेताओं या खेल जगत के लोगों को फिल्म या विज्ञापन में धूम्रपान करता देखेंगे तो वे भी ऐसा करने को प्रोत्साहित होंगे।

सरकार ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब लोग विशेषकर युवा और बच्चे जो पर्दे पर देखते हैं उसकी नकल करने की कोशिश करते हैं। कुछ मामलों में लोगों ने फिल्म में जो देखा उसकी नकल करने के लिये ऊंची इमारतों से छलांग भी लगा दी। लिहाजा अगर पर्दे पर धूम्रपान की इजाजत दी जाएगी तो ऐसा ही होगा।

केंद्र ने यह दलील न्यायमूर्ति एसके कौल के समक्ष दी जो अंतिम फैसला करने के लिये इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों में धूम्रपान के दृश्य प्रतिबंधित करने की सरकार की अधिसूचना को चुनौती देते हुए दाखिल की गई फिल्मकार महेश भट्ट की याचिका पर एक खंडपीठ ने पूर्व में विभाजित फैसला सुनाया था।

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