फिर से हरित क्रांति की जरूरत: कलाम

 
Nov 21, 10:12 pm

नई दिल्ली। कृषि योग्य घटती जमीन और पानी की किल्लत के बावजूद अनाज की बढ़ती मांगों को देखते हुए पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने कृषि वैज्ञानिकों को पैदावार दोगुना करने का रास्ता तलाशने का सुझाव दिया है। उन्होंने सहकारिता के जरिए ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण के लिए इफको की भी प्रशंसा की।

शुक्रवार को कलाम ने वर्ष 2007-08 के लिए सहकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे कुछ लोगों को पुरस्कृत किया। इफको सहकारिता रत्न पुरस्कार उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव को दिया। जबकि सहकारी आंदोलन में विशिष्ट सेवाओं के लिए सहकारी बंधु पुरस्कार मरणोपरांत सवाई सिंह सिसोदिया को दिया गया। इस अवसर पर कलाम ने अनाज की पैदावार की बाबत चेताया। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या तथा क्रय शक्ति को देखते हुए भारत को वर्ष 2020 तक 340 मिलियन टन खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। जबकि पर्यावरण संतुलन के लिए वृक्षारोपण की आवश्यकता को देखते हुए तय है कि खेती की जमीन कम होगी। लिहाजा समय पर सचेत होते हुए कृषि वैज्ञानिकों को पैदावार दोगुना करने के उपाय ढूंढ़ने होंगे। उन्होंने इफको का आह्वान किया कि वह ग्रामीण भारत के विकास के लिए सक्रिय भूमिका निभाए और शहरों तथा गांवों के बीच दूरी कम करे। उन्होंने आशा जताई कि इफको विभिन्न भागों में पुराउपलब्ध कराए जिससे नया ग्रामीण भारत सामने आए।

इफको के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जाखड़ ने कहा कि इफको सहकारी क्षेत्र में उवर्रकों का सर्वाधिक उत्पादन करने वाली संस्था है। लेकिन कलाम ने सुझाव दिया कि इफको को खाद उत्पादन और मार्केटिंग से थोड़ा ऊपर उठकर सामाजिक आर्थिक विकास में भागीदारी निभानी चाहिए।




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