पटना। बिहार सरकार राज्य में मुसहर समुदाय के उत्थान के लिए चूहा पालन की जो योजना बना रही है उसका समुदाय के लोग ही विरोध कर रहे है। समुदाय के लोगों का कहना है कि चूहे पालन के काम से उनका विकास संभव नहीं है, उन्हे कंप्यूटर शिक्षा की आवश्यकता है।
'राष्ट्रीय मुसहर-भूईयां विकास परिषद' के संयोजक उमेश मांझी ने बताया कि उन्होंने सरकार से प्रस्तावित योजना को शुरू नहीं करने की अपील की है। मांझी ने कहा कि हमें चूहे पालन के बजाय कंप्यूटर चाहिए। समय बदल चुका है हम बदलाव के इच्छुक है और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए जीवनशैली में बदलाव लाना चाहते है। मांझी ने कहा कि जिस समय देश चंद्रयान की बात कर रहा है उसी समय बिहार सरकार दलितों के लिए चूहा पालन की योजना बना रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि बिहार में मुसहर समुदाय के लोगों को चूहे का शिकार करने और उसे खाने को लेकर पहचाना जाता है। राज्य में लगभग 23 लाख मुसहर है, जिसमें पांच प्रतिशत से कम ही साक्षर है। 'राष्ट्रीय मुसहर-भूईयां विकास परिषद' के महासचिव राजेंद्र मांझी ने कहा कि दलितों में गरीब तबके के लोगों को शिक्षा और खासकर व्यावसायिक शिक्षा की जरूरत है। उन्हे चूहे पालन की आवश्यकता नहीं है।