मुंबई। भारत की उच्च आर्थिक विकास दर के बावजूद महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है। विश्व बैंक द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुपोषित [उम्र के हिसाब से कम वजन वाले] बच्चों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है।
विश्व बैंक द्वारा जारी 'द वर्ल्ड बैंक इन इंडिया' नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक दशक के दौरान भारत सहित दक्षिण एशिया में जितनी तेजी से आर्थिक विकास हुआ है, कुपोषण भी उतनी ही तेजी से बढ़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन [डब्ल्यूएचओ] के मुताबिक दुनिया के कुल कुपोषित बच्चों में 49 फीसदी भारत में हैं। इसके अलावा जिन बच्चों का विकास अवरुद्ध हो चुका है, उनमें 34 फीसदी और ऐसे बच्चे जो कोई काम नहीं कर सकते उनमें 46 प्रतिशत भारत में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुपोषण की दर राज्यों व सामाजिक-आर्थिक समूहों के हिसाब से अलग-अलग है। राज्यों में मध्य प्रदेश, बिहार व झारखंड तथा अनुसूचित जाति व जनजातियों में कुपोषण की दर सबसे ज्यादा है। देश के शहरी इलाकों में भी एक तिहाई बच्चे कुपोषित हैं। आमतौर पर कुपोषण के लिए गरीबी को सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
दक्षिण एशियाई देशों की विकास दर सब-सहारा अफ्रीका की तुलना में काफी ज्यादा रही लेकिन इससे कुपोषण में कोई कमी नहीं आई।