
नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह] स्कूलों में बच्चों की पिटाई या दूसरी शारीरिक सजा पर प्रिंसिपल या टीचर को जिम्मेदार बताकर जिलाधिकारियों के लिए पल्ला झाड़ना आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सख्ती का असर हुआ तो ऐसे मामलों को रोकने में विफल डीएम के भी खिलाफ कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं, इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट के बाद आयोग राज्य सरकारों से भी जवाब तलब करेगा।
दिल्ली नगर निगम के एक स्कूल की नौ साल की छात्रा शन्नो की मौत ने लगभग सबसे ज्यादा अधिकार संपन्न एनसीपीसीआर के कान खड़े कर दिए हैं। शन्नो को स्कूल में सजा के तौर पर कड़ी धूप में देर तक ईट लेकर खड़ा रखा गया था। जुलाई में शुरू होने वाले अगले शैक्षिक सत्र के पहले सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे एक निर्देश में उसने साफ कहा है कि स्कूलों में बच्चों की पिटाई या दूसरे शारीरिक दंड को रोकने में नाकाम जिलाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आयोग ने स्कूली बच्चों को शारीरिक दंड देने से रोकने के लिए राज्यों के मुख्य सचिवों व शिक्षा सचिवों को नए दिशा-निर्देश भी दिए हैं। उसने कहा है कि शारीरिक दंड के नए मामलों को लेकर ब्लाक व क्लस्टर के स्तर पर प्रधानाचार्यो की नियमित बैठक होनी चाहिए। उसमें साफ किया जाना चाहिए कि बच्चों की पिटाई की गई तो संबंधित लोगों के साथ ही स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। जिला, ब्लाक स्तर के शिक्षा अधिकारी, क्लस्टर रिसोर्स सेंटर के कर्मचारियों के स्तर से भी स्कूलों को जरूरी निर्देश जारी करने को कहा गया है।
आयोग ने इसके साथ ही दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराने में नाकाम जिला व ब्लाक स्तर के शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ शिक्षा सचिव से कड़ी कार्रवाई करने की अपेक्षा की है। बच्चों को शारीरिक सजा को लेकर की गई कार्रवाई की बाबत जिलाधिकारियों को आगामी एक अगस्त तक राज्यों के शिक्षा सचिवों को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जबकि राज्य सरकारों को उन रिपोर्ट्स के आधार पर सितंबर महीने तक राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को एक समग्र रिपोर्ट सौंपनी होगी। आयोग ने चेताया है कि वह रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करेगा। उसके बाद आवश्यक हुआ तो संबंधित राज्य सरकार के खिलाफ भी जरूरी कार्रवाई की जाएगी।