नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। ऐसे लोग बिरले ही होंगे जिनका खूबसूरत ठिकाने पर छुट्टियां बिताने का उत्साह भारतीय रेल ने ठंडा न किया हो। ट्रेन में कदम रखते ही गंदगी से सामना और फिर पूरे सफर के दौरान अव्यवस्था का बोलबाला। लेकिन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने वर्ष 2009-10 के लिए पेश रेल बजट में कुछ बदलाव की उम्मीद जगाई है। उन्होंने ईएमयू व डीएमयू जैसी लोकल ट्रेनों में शौचालय का इंतजाम करने की घोषणा की है। साथ ही, यह भी कहा है कि ट्रेन में बिस्तर साफ-सुथरा मिलेगा।
ईएमयू और मेमू जैसी लोकल ट्रेनों में यात्रा का समय चार घंटे से कम होने की वजह से शौचालय नहीं बनाए गए थे। लेकिन बुजुर्गो, बच्चों और महिलाओं को इससे परेशानी होती है। इसे देखते हुए इस बजट में इन ट्रेनों में शौचालय की व्यवस्था करने का प्रावधान रखा गया है। सफाई सुनिश्चित करने के मकसद से हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले वैक्यूम शौचालयों को सवारी गाड़ी में भी लगाए जाने का बंदोबस्त किया जाएगा। इससे स्टेशनों पर खड़ी गाड़ी में शौचालय के इस्तेमाल से फैलने वाली गंदगी रोकी जा सकेगी।
रेल बजट के प्रावधान को लागू किया गया तो जल्द ही 'आन बोर्ड हाउस कीपिंग स्कीम' [ओबीएचएस] का नतीजा तकरीबन 200 अतिरिक्त जोड़ी गाड़ियों में देखने को मिलेगा। यानी धुलाई की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार और आधुनिक मशीनों से बेहतर लिनेन प्रबंधन सबके सामने होगा। अभी यह पायलट परियोजना मुंबई, दिल्ली, कोलकाता चेन्नई और तिरुवनंतपुरम जैसे महानगरों में प्रारंभ की जाएगी।
रेल में सफर के दौरान सेहत बिगड़ने पर यात्रियों को डाक्टर भी मिलेंगे। पहली बार लंबी दूरी की गाड़ियों में डाक्टरों की तैनाती का प्रावधान बजट मेंहै। महानगरों में एम्बुलेंस सेवा प्रदान करने की संभावना भी तलाशी जाएगी। इंटरसिटी ट्रेनों में दो मंजिल वाले वातानुकूलित सवारी डिब्बे लगाने का उपाय भी किया जा रहा है।
राजधानी और शताब्दी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में सूचना और मनोरंजन का इंतजाम भी किया जाएगा। जाहिर है, ट्रेन में लंबी यात्रा कर रहे लोगों को ऊब से बचाने के लिए यह उपाय किया जाएगा। साथ ही उन्हें यात्रा के दौरान बीच में पड़ने वाले शहरों से जुड़ी जानकारियां भी दी जाएंगी।