श्रीनगर [जागरण ब्यूरो]। कश्मीर घाटी में लगातार तीन दिन तक बंद के दौरान अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन शुक्रवार को फिर पटरी पर आ गया। हालांकि बारामूला और शोपियां में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। घाटी के अन्य जगहों पर व्यापारिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थाएं, सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय खुले रहे। यातायात भी सामान्य ढंग से चलता रहा।
याद रहे कि बीते रविवार को बारामूला में एक महिला से थाने में दुर्व्यवहार के बाद कस्बे में हिंसा भड़क उठी थी। हिंसा में चार युवकों की मौत के खिलाफ हुर्रियत कांफ्रेंस ने तीस जून से दो जुलाई तक हड़ताल का आह्वान किया था। हड़ताल के कारण पूरी वादी में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। धारा 144 लागू होने के बावजूद वादी के कई इलाकों में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें होती रहीं।
शुक्रवार को बंद समाप्त होते ही बारामूला और शोपियां को छोड़ वादी के सभी इलाकों में आम जनजीवन फिर पटरी पर आ गया। शोपियां और बारमूला में शुक्रवार को भी हड़ताल रही। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के एक दर्जन कार्यकर्ताओं को सुरक्षाबलों ने हिरासत में ले लिया।
सोपोर में तनाव, बीस जख्मी
बारामूला। सोपोर में शुक्रवार रात उस समय हिंसक प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया, जब दो दिन पहले झेलम नदी में डूबे नाबालिग छात्र खालिद भट्ट का शव उसके घर पहुंचा। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठियां, आंसू गैस के साथ रबर की गोलियां भी चलानी पड़ी। इसमें बीस लोगों के जख्मी हो गए, जिसमें दो मीडियाकर्मी भी शामिल है।
बताया जाता है कि छात्र खालिद दो दिन पूर्व रहस्यमय हालात में झेलम नदी में गिर गया था। उसका शव शुक्रवार को शीरी इलाके में पुलिस ने नदी के किनारे से बरामद किया। शाम को शव जैसे ही सोपोर पहुंचा, लोग सड़कों पर उतर आए। स्थानीय लोगों ने खालिद की मौत के लिए सीआरपीएफ को जिम्मेदार ठहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों व स्थानीय लोगों में झड़पें हुई।