समाचार

मैसूर में हिंसा पर राजनीति तेज

Jul 04, 08:21 pm
  Print

मैसूर। कर्नाटक के मैसूर में दो दिन पहले भड़की सांप्रदायिक हिंसा पर राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी कांग्रेस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग पर जोर दे रही है, जबकि सत्ताधारी भाजपा ने यह मांग सिरे से खारिज कर दी है। वहीं, एक स्थानीय युवा भाजपा नेता पर हमले के विरोध में शनिवार को एक हिंदू संगठन ने मैसूर बंद रखा।

गुरुवार को एक मदरसे को कथित तौर पर अपवित्र किए जाने के विरोध में दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। हिंसा प्रभावित इलाके में शनिवार को भी स्थिति तनावपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में रही। इलाके में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

राज्य के गृह मंत्री वी.एस. आचार्य ने शनिवार को कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच की कोई जरूरत नहीं है। हिंसा में घायल हुए लोगों को देखने अस्पताल पहुंचे आचार्य ने मीडिया को बताया, 'पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह भीड़ पर गोलियां ना चलाए। स्थिति बिगड़ने न पाए, इसके लिए सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।' उन्होंने कहा कि इस मामले में करीब 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आचार्य को हिंदू जागरण वेदिके नाम के संगठन के कार्यकर्ताओं का विरोध भी झेलना पड़ा। संगठन के कार्यकताओं ने आरोप लगाया कि मैसूर में हिंदुओं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।

उधर, गिरिधर नाम के एक भाजपा नेता पर हुए हमले के विरोध में शनिवार को हिंदू जागरण वेदिके ने मैसूर शहर में बंद आयोजित किया। बंद के दौरान व्यापारियों ने कारोबार बंद रखा और सड़कें सूनी नजर आई।

युवा भाजपा की मैसूर ईकाई के नेता गिरिधर पर शुक्रवार को एक अज्ञात व्यक्ति ने हमला बोल दिया था। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। डाक्टर उनकी हालत नाजुक बता रहे हैं। पुलिस ने बताया कि हमले में घायल हुए गिरिधर के मित्र वाजिद की हालत अब ठीक है।

  • निजता नीति
  • सेवा की शर्तें
  • आपके सुझाव
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2007 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित
कॉपीराइट / IP नीति