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गुजरात से प्रशांत महासागर तक ग्रहण की छाया

Jul 04, 10:21 pm
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इलाहाबाद। सूर्य ग्रहण के दिन चन्द्र की काली छाया गुजरात से प्रशान्त महासागर तक फैलेगी। देश के करीब एक दर्जन प्रदेशों में सूर्य उगते ही डूब जाएगा। जवाहर नक्षत्रशाला के निदेशक वैज्ञानिक प्रमोद पाण्डेय का कहना है कि ग्रहण की छाया, यूपी, बिहार, पश्चिमी बंगाल, असोम फिर चीन होते हुए प्रशान्त महासागर पहुंचेगी।

नक्षत्रशाला में दूरबीन से सूर्य ग्रहण को दिखाने का प्रयास किया जाएगा। खगोलविदों की मानें तो ऐसा दुर्लभ संयोग फिर 123 साल बाद ही आएगा।

ज्योतिर्विदों ने इस छाया के परिणामों की व्याख्या ग्रह नक्षत्रों के अनुसार की है। उनका कहना है कि जब तक ग्रहण आंखों से दिखता रहे तब तक ग्रहण का पुण्यकाल है। परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि बादल की ओट आ जाने से न दिखाई दे तो पुण्यकाल न माना जाय। ग्रहण का प्रभाव शुभ और अशुभ दोनों हो सकता है। श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या 22 जुलाई बुधवार को पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव राशिगत इस प्रकार है। वृष, कन्या, तुला और कुम्भ राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी और सुख देने वाला होगा तो शेष आठ राशियों के जातकों को कष्ट पहुंचाएगा।

श्री धर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य पं. देवेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी का मानना है कि सूर्यग्रहण मेष को व्यथा, मिथुन को क्षति, कर्क को घात, सिंह को हानि, वृश्चिक को मान नाश, धनु को मृत्यु तुल्य कष्ट, मकर को स्त्री पीड़ा, मीन राशि वालों के चिंता कारक बनेगा। शेष चार राशि ही शुभप्रद होंगी।

ज्योतिर्विदों का मानना है[गणेश व ऋषीकेश पंचांग के अनुसार] कि चूंकि 7 जुलाई को चन्द्र ग्रहण देश में नहीं दिखाई पड़ेगा। इसका प्रभाव भी विदेश पर ही पड़ेगा यहां नहीं।

ग्रहण का समय: 22 जुलाई को सूर्योदय प्रात: 5 बजकर 22 मिनट पर होगा और इसके कुछ ही मिनटों बाद अर्थात् 5 बजकर 30 मिनट पर सूर्य ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा। इसका मध्य काल 6 बजकर 25 मिनट 31 सेकेंड से 54 सेकेंड तक मोक्ष प्रात: 7 बजकर 26 मिनट 45 सेकेंड पर होगा।

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