
नई दिल्ली [अरशद फरीदी]। समलैंगिकता को कानूनी मान्यता देने संबंधी निर्णय का उलेमाओं ने कड़ा विरोध किया है। कहा है कि यह इस्लाम विरोधी है। वे इस मामले को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की बैठक में उठाने की तैयारी में हैं। वहीं, जमीयतुल उलेमा-ए-हिंद ने इस मुद्दे पर 10 जुलाई को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। मुस्लिम नेतृत्व ने केंद्र सरकार से इस संबंध हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की मांग की है।
पर्सनल ला बोर्ड के महासचिव मौलाना सैयद निजामुद्दीन ने कहा कि समलैंगिकता पूरी तरह से गैर इस्लामी और गैर इंसानी अमल है। इसे कानूनी मान्यता देने से न केवल शरियत का मजाक होगा, बल्कि पश्चिमी संस्कृति की बुराई की ओर देश को ढकेलना होगा। इस पर केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि देश को सांस्कृतिक तबाही से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि पर्सनल ला बोर्ड की 11 व 12 जुलाई को केरल के कालीकट में बैठक बुलाई गई है। जिसमें इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
उलेमा काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना अबू तालिब रहमानी ने कहा कि इस फैसले से सभी धर्मो की आस्था प्रभावित हुई है। यह देश की वर्तमान तथा भावी पीढ़ी की मानसिकता को विकृत करेगा। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के अध्यक्ष जावेद हबीब ने भी समलैंगिकता को गैर इस्लामी करार दिया है।