
नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। अपनी सेहत को लेकर लोगों के मन तमाम भ्रांतियां होती हैं। इसके चलते वे स्वत: ही नियम बना लेते हैं कि क्या खाएं और क्या नहीं। लेकिन सेहत से जुड़े ये नियम हमेशा सच नहीं होते। इसके मद्देनजर पेश है स्वास्थ्य से जुड़े मिथक व उनकी सच्चाई के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
मिथक: ंकार्बोहाइट्रेट युक्त भोजन करने से मोटापा बढ़ता है।
सच्चाई: स्टार्च यानी कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन केवल उसी दशा में मोटापा बढ़ाता हो जब उसमें क्रीम जैसा वसा पदार्थ मौजूद हो।
मिथक: रोजाना आठ गिलास पानी पीना चाहिए।ं
सच्चाई: ज्यादा मात्रा में पानी पीना भी खतरनाक साबित हो सकता है। इससे जान भी जा सकती है। ज्यादातर लोगों के लिए एक लीटर पानी पर्याप्त होता है जिसे जूस, चाय, काफी या किसी अन्य पेय पदार्थ से प्राप्त किया जा सकता है।
मिथक: उपापचय [मेटाबोलिज्म] ठीक नहीं होने से मोटापा बढ़ता है।
सच्चाई: मोटे लोगों में मेटाबोलिज्म तेजी से होता है और वे दुबले लोगों की अपेक्षा ज्यादा कैलोरी खर्च करते हैं।
मिथक: गर्भवती महिलाओं को दो लोगों के लिए खाना चाहिए।
सच्चाई: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रतिदिन अतिरिक्त 200 कैलोरी की जरूरत होती है जिसके लिए दो ब्रेड ही काफी हैं।
मिथक: विटामिन के सेवन से उम्र बढ़ती है।
सच्चाई: एंटी-आक्सीडेंट माने जाने वाले विटामिन ए, सी व ई उम्र नहीं बढ़ाते बल्कि इनसे समयपूर्व मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
मिथक: चाकलेट खाने से फुंसियां होती हैं।
सच्चाई: दाने या फुंसियां होने का प्रमुख कारण चेहरे पर मौजूद तेल ग्रंथियों पर हार्मोन का प्रभाव है। तनाव के कारण भी ऐसा होता है।
मिथक: शुगर बच्चों को अतिक्रियाशील बनाती है।
सच्चाई: शुगर [शर्करा] अतिक्रियाशील व्यवहार के लिए जिम्मेदार नहीं होती। जब अभिभावकों को यह लगता है कि मीठे पेय पीने के बाद उनके बच्चे अतिक्रियाशील हो गए है, तो यह उनका वहम होता है।
मिथक: काफी पीना सेहत के लिए हानिकारक है।
सच्चाई: दिन में दो से तीन कप काफी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। काफी पीने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 30 फीसदी तक कम हो जाता है।
मिथक: भोजन के बाद तैरना खतरनाक है।
सच्चाई: पेट भरा होने के बाद कसरत करने से पेट में ऐंठन होती है जिससे उल्टियां हो सकती हैं। हालांकि इसका कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है।
मिथक: दर्द नहीं है तो हार्ट अटैक नहीं होगा।
सच्चाई: आमतौर पर हार्ट अटैक को दिल में तेज दर्द से जोड़ा जाता है लेकिन 40 फीसदी अटैक में दर्द नहीं होता। इसे खामोश हार्ट अटैक कहा जाता है। जबड़े, गर्दन या कंधे में दर्द को ऐसे हार्ट अटैक का लक्षण बताया गया है।