
नई दिल्ली [मुकेश केजरीवाल]। निष्पक्ष और निडर पुलिस अधिकारी के तौर पर ख्यात रहीं किरण बेदी को देश का मुख्य सूचना आयुक्त बनाने की मुहिम को और बल मिल गया है। बेदी ने अब खुद सामने आ कर कहा है कि उन्हें यह पद मंजूर करने से कोई एतराज नहीं। उनकी मंजूरी के बाद केंद्र सरकार पर उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त बनाने का दबाव बढ़ सकता है।
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बेदी ने मंगलवार को पहली बार इस पूरे मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने 'दैनिक जागरण' से कहा, 'ऐसी सेवा के काम से मैं कभी नहीं भागूंगी। यह तो बहुत अहम काम है। मैं यह सेवा बिल्कुल नि:शुल्क करूंगी और चौबीस घंटे करूंगी।' उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वे इसे नौकरी नहीं, बल्कि सेवा समझ कर करने को तैयार हैं।
सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी को बहुत अहम बताते हुए बेदी ने कहा कि लोगों को सूचना का अधिकार मिलने की राह में जानकारी और भरोसे की कमी बड़ी समस्याएं हैं। सूचना आयुक्त अपनी तत्परता बढ़ा कर लोगों को भरोसा कायम कर सकते हैं।
देश में सूचना का अधिकार यानी आरटीआई कानून को मजबूत करने के कई पैरोकारों की ओर से लगातार यह मांग की जा रही है कि किरण बेदी को सरकार अगला मुख्य सूचना आयुक्त बनाए। इसके लिए समाजसेवी अन्ना हजारे से ले कर फिल्म अभिनेता आमिर खान तक, बहुत से लोगों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। इस पद पर नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता की सहमति से ही राष्ट्रपति को किसी नाम की सिफारिश करता है।
बेदी को इससे पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद पर नियुक्त किए जाने को उनकी योग्यता के बावजूद केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी थी। अब यह पूछने पर कि क्या सरकार आपको यह पद सौंपेगी, बेदी ने कहा, 'यह फैसला तो सरकार को करना है। मैं सिर्फ यही कह सकती हूं कि अगर इस सेवा का मौका मिलेगा तो मैं जरूर करूंगी।' हालांकि, इस पद के लिए अपनी दावेदारी और मजबूत करते हुए वह यह कहना नहीं भूलीं कि जिन कामों के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया, वह सब सूचना के अधिकार के दम पर ही मुमकिन हो पाए। तिहाड़ जेल में लाए सुधार हों या फिर पुलिस सुधार, हर जगह उन्होंने लोगों को सबसे पहले पूछने और जानने का हक दिया। तिहाड़ जेल के अंदर 'फीडबैक बाक्स' घुमाने शुरू किए गए, तब पता चला कि असली समस्या क्या है और आखिर सुधार कैसे हो।