
नई दिल्ली, [प्रणय उपाध्याय]। आतंकवाद और उग्रवाद प्रभावित इलाकों में फौजी वर्दी के बढ़ते दुरुपयोग से परेशान रक्षा मंत्रालय ने अब नक्कालों की नकेल कसने का इंतजाम कर लिया है। सैनिक वर्दी का गलत इस्तेमाल रोकने की कवायद के तहत इसे कोलकाता स्थित डिजाइन पंजीयन कार्यालय में निबंधित कराया गया है। रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी जारी कर आगाह भी किया है कि किसी भी रूप में वर्दी की नकल सख्त कानूनी कार्रवाई को न्यौता देगी।
चेन्नई के नजदीक अवड़ी स्थित आर्डिनेंस क्लोथिंग फैक्ट्री के संयुक्त महाप्रबंधक सुशील सिन्हा ने दैनिक जागरण को बताया कि रक्षा मंत्रालय को लगातार इस तरह की सूचनाएं मिल रही थीं कि बाजार में फौजी वर्दी की नकल बेची जा रही है। जाहिर तौर पर यदि इस तरह की नकल उपलब्ध है तो इसके गलत इस्तेमाल का जोखिम मोल नहीं लिया जा सकता। लिहाजा आर्डिनेंस फैक्ट्री ने सेना की युद्धक वर्दी यानी 'बैटल फटीग' के दो नमूनों को डिजाइन एक्ट 2000 के तहत पंजीकृत कराया है। इनमें आपरेशन के दौरान जंगल और रेगिस्तानी इलाकों में पहने जाने वाले वर्दी के पैटर्न शामिल हैं। साथ ही वर्दी के पंजीकृत डिजाइन में सेना का प्रतीक चिह्न और अशोक चक्र भी शामिल है।
सिन्हा कहते हैं कि अब कोई भी व्यक्ति या कंपनी आर्डिनेंस फैक्ट्री की इजाजत के बिना इस तरह के कपड़े बनाती-बेचती है तो वह गैरकानूनी होगा और उसके खिलाफ अपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा।
सेना मुख्यालय के आला अफसर मानते हैं कि वर्दी का दुरुपयोग रोकने की ठोस कवायद अशांत क्षेत्रों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में कई बार आतंकी और उग्रवादी ढाल के रूप में सेना की वर्दी का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही वर्दी की पहचान से धोखा खाकर कई बार मासूम जानें भी संकट में आ जाती हैं।
अभी हाल ही में रावलपिंडी में पाक सेना मुख्यालय पर हुए हमले में आतंकी फौजी वर्दी के धोखे के सहारे ही दाखिल हुए थे। वहीं 2002 में गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर में भी आतंकी कमांडो का रूप धर कर ही दाखिल हुए थे। अमरनाथ और जम्मू के रघुनाथ मंदिर पर हुए हमलों में भी आतंकियों ने फौजी वर्दी की आड़ ली थी। साथ ही धरपकड़ के कई अभियानों में भी आतंकियों के पास से फौजी वर्दी बरामद की जाती रही है। बताते चलें कि बीते दिनों सेना ने वर्दी का दुरुपयोग नियंत्रित करने के लिए इसे पहनने और सजाने के नियम कायदों को भी बदल दिया है।