कोसी में घटते जंगल खतरे की घंटी

 
Nov 04, 11:50 am

पूर्णिया। कोसी में सिमटते जंगल बजा रहे हैं खतरे की घटी। कभी पूर्ण अरण्य रहा पूर्णिया एवं कोसी के अन्य जिलों में हालात में तेजी से आये बदलाव का असर अब यहा के मौसम पर दिखने लगा है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से अब मिनी दार्जिलिंग के उपनाम से चर्चित पूर्णिया व उसके आसपास के जिलों के मौसम का मिजाज भी गर्म होने लगा है।

वर्ष दर वर्ष गर्मी के पारा में आ रहे उछाल ने पर्यावरण विदों को भी सकते में डाल दिया है। पूर्णिया एवं अररिया के वन प्रमंडल पदाधिकारी ए. के प्रसाद एवं एन. के माझी ने भी माना की वनों की लगातार सिमटने जाने का असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। उनके अनुसार इसी को दूर करने के लिये हर वर्ष 80 हजार नये पेड़ लगाने की योजना कोसी के हर जिले में बनायी गयी है। वन विभाग के आकड़ों के अनुसार कोसी के पूर्णिया जिले में 502.02 हेक्टयर में जंगल था जो अब सिमटकर लगभग 201 हेक्टेयर में रह गया है। इसमें 171 हेक्टेयर जंगल सिंघिया में, 1.91 हेक्टेयर कोहबारा में, 1.62 हेक्टेयर मधुबनी में तथा 26.44 हेक्टयर जंगल हासी में सुरक्षित बचे हैं।

इन बचे जंगलों में भी पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण के संतुलन को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। कटिहार जिले में 37.57 हेक्टेयर में जंगल था जो अब धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। इसके अलावा पूर्णिया वन प्रमंडल में डेढ़ हजार से ज्यादा नहर एवं सड़क है जिनके किनारे पेड़ लगाकर उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया है। इसके अलावा अररिया जिले में 26 सौ एकड़ में सुरक्षित वन क्षेत्र आजमगढ़, रहिमपुर एवं सिमरबन्नी सहित कई स्थानों पर है। इन जंगलों में भी पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है और जंगल लगातार सिमटते जा रहे हैं।

वन क्षेत्र की जमीन पर किसी तरह के कब्जे पर रोक लगाने का 1996 में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने के बाद भी कई क्षेत्रों में अवैध ढंग से जमीन पर कब्जे किये जा रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2000 के बाद से तो कोसी के मौसम की स्थिति में काफी तेजी से बदलाव आया है। पूर्व में मई व जून के माह में भी यहा का तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता था। परंतु अब जो बदलाव दिख रहा है वह भविष्य के लिए सुखद नहंी है। वर्ष 2009 के मई माह में यहा का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो बिल्कुल अप्रत्याशित था।

जून में स्थिति और विकट हो गयी और तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। गर्मी के इस आकड़े ने पचास वर्षो के पारा चढ़ने के सभी आकड़ों को ध्वस्त कर दिया। अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस इस वर्ष 9 जून को रिकार्ड किया गया। वर्ष 2006 में पड़ी गर्मी भी मौसम विभाग के लिए चौकाने वाला रहा। उस वर्ष अप्रैल माह में ही पूर्णिया का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था। वर्ष 2008 में भी स्थिति विकट ही रही। उस वर्ष माह अप्रैल में तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जबकि जून में पारा 40 के पार पहुंच गया था। पर्यावरण के बढ़ते खतरे के कारण ही वर्षा के अनुपात में भी कमी आती जा रही है। आकड़ों के अनुसार हर वर्ष पाच से आठ फीसदी वर्षा कोसी में कम होती जा रही है जिसका सीधा असर खेतों की हरियाली पर पड़ रहा है।

पर्यावरण मामले में दिलचस्पी रखने वाले प्रो. मनोज कुमार मानते हैं कि यह ग्लोबल वार्मिग का असर है। हालाकि पूर्णिया के मामले में भी वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से मौसम के मिजाज में यह बदलाव आया है और इसका निदान भी वृक्ष लगाना ही है।




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