स्मारक विवाद में यूपी सरकार को थोड़ी राहत

 
Nov 04, 02:37 pm

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लखनऊ में मूर्तियों, स्मारकों और पार्कों के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार का दिन उत्तर प्रदेश सरकार के लिए कुछ राहत भरा रहा। निर्माण पर लगी रोक हटाने की मांग पर जहां सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, वहीं अवमानना मामले में अदालत में पेश हुए मुख्य सचिव को अगले आदेश तक निजी पेशी से छूट भी दे दी। स्मृति उपवन में लखनऊ महोत्सव के आयोजन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति भी नहीं रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता अवमानना मामले में कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बुधवार को न्यायमूर्ति एच.एस. बेदी व न्यायमूर्ति जे.एम. पांचाल की पीठ के सामने पेश हुए। अदालत के कारण बताओ नोटिस पर वह पहले ही हलफनामा दाखिल कर माफी मांग चुके हैं। उनके वकील ने कोर्ट से अगली सुनवाई पर उन्हें पेशी से छूट दिए जाने का अनुरोध किया, लेकिन निर्माण का विरोध कर रहे याचिकाकर्ता मिथिलेश कुमार सिंह के वकील अभिषेक मनु सिंघवी व सी.डी. सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया। पीठ ने विरोध दरकिनार करते हुए कहा कि जब वे लिखित तौर पर माफी मांग चुके हैं तो फिर हर सुनवाई पर उन्हें क्यों बुलाया जाए। कोर्ट ने गुप्ता को अगले आदेश तक पेशी से छूट दे दी।

सिंघवी ने गुप्ता के हलफनामे और निर्माण पर लगी रोक हटाने की अर्जी का जवाब देने के लिए कोर्ट से समय मांगा। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए सिंघवी की आपत्तियों पर बाद में गौर करने की बात कही। कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 11 नवंबर तय कर दी।

स्मृति उपवन में लखनऊ महोत्सव आयोजित करने को लेकर बना असमंजस भी बुधवार को खत्म हो गया। राज्य सरकार ने आयोजन की तैयारियों में बाधा नहीं पहुंचाने का निर्देश मांगने वाली अपनी अर्जी कोर्ट से वापस ले ली, तो मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश की पीठ की टिप्पणियों से आयोजन का रास्ता भी साफ हो गया।

जब राज्य सरकार के वकील सतीश चंद्र मिश्रा ने प्रतिवादियों को आयोजन में दखल देने से रोकने का निर्देश मांगा तो पीठ ने उनकी अर्जी पर ही सवाल उठा दिया। कोर्ट ने कहा कि स्मृति उपवन में निर्माण के मामले में जब गत वर्ष 12 दिसंबर के रोक आदेश का लाभ राज्य सरकार को मिल रहा है तो फिर इस अर्जी की क्या जरूरत है। पीठ की टिप्पणियों के बाद मिश्रा ने अर्जी वापस ले ली। इससे पहले स्मृति उपवन में निर्माण और नाम बदलने के मामले में याचिकाकर्ता अशोक यादव देव के वकील राजीव दत्ता ने अर्जी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अग्रवाल और न्यायमूर्ति आफताब आलम की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की स्थानांतरण याचिका से संबंधित सभी मामलों में निर्माण पर रोक लगा दी है। यह मामला न्यायमूर्ति बेदी व न्यायमूर्ति पांचाल की पीठ के सामने आज ही सुनवाई के लिए लगा है। अत: इस मामले को भी वहीं भेजा जाए।

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना था कि यह मामला अलग है और इसमें मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने ही गत वर्ष 12 दिसंबर को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए सशर्त निर्माण की अनुमति दी थी।




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