
नई दिल्ली। ..तो क्या वाकई 21 दिसंबर 2012 में आएगा महाविनाश और दुनिया मिट जाएगी?
इन दिनों यह बहस इंटरनेट, न्यूज चैनल्स और ब्लाग्स पर देख-सुन कर लोगों के दिल की धड़कनें बढ़ गई है। इस बारे में लोग के जेहन में तमाम तरह की आशंकाएं उठने लगी हैं।
इंटरनेट और ब्लाग्स पर दुनिया भर के कई एस्ट्रोलॉजर्स और कुछ तथाकथित वैज्ञानिक इसको लेकर तमाम तरह के दावे कर रहे हैं। लेकिन अधिकांश साइंटिस्ट्स इसे बकवास करार देते हैं। प्रोफेसर यशपाल के अनुसार कई हजार ग्रह और आकाशीय पिंड चक्कर लगा रहे हैं जो कभी न कभी पृथ्वी के पास से गुजरेंगे। इसके टकराने की आशंका रहती है।
ऐसे ही प्लैनेट एक्स भी हमारी पृथ्वी के कई हजार किलोमीटर करीब से गुजर सकता है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है। लेकिन यह कहना कि यह पृथ्वी से टकरा जाएगा, और धरती पर प्रलय आ जाएगी इसकी संभावना नहीं के बराबर है।
जबकि जर्मनी के साइंटिस्ट्स रोसी ओडानील और विली नेल्सन ने 21 दिसंबर 2012 को एक्स ग्रह से पृथ्वी की टक्कर की बात कहते है। उनके अनुसार यदि ऐसा होता है तो धरती पर इतना अधिक विनाश होगा कि संपूर्ण मानव प्रजाति के अस्तित्व पर संकट आ सकता है। उन वैज्ञानिकों को आशंका है कि प्लैनेट एक्स नाम का यह ग्रह धरती के काफी पास से गुजरेगा। इससे इसके पृथ्वी से टकराने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो पृथ्वी को कोई बचा नहीं सकेगा।
आपको बताते चले की यह अफवाह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका, कनाडा और समूचे यूरोप में फैल चुकी है कि 21 दिसंबर 2012 में दुनिया का वजूद खत्म हो जाएगा।
इंटरनेट पर जारी बहस में लोगों का मानना है कि हजारों साल पहले ही यह अनुमान लगा लिया गया था कि 21 दिसंबर 2012 को पृथ्वी पर प्रलय होगी। एस्ट्रोलॉजर्स की बातों पर यकीन करें तो यह तारीख प्राचीन माया सभ्यता के एक मिथक से जोड़ कर भी देखी जा रही है। गणितीय और खगोलीय मामले में बेहद उन्नत मानी गई इस सभ्यता के कैलेंडर में पृथ्वी की उम्र 5226 वर्ष आंकी गई है। वहीं ग्रेगेरियन कैलेंडर के हिसाब से धरती की उम्र 21 दिसंबर 2012 बताई गई है।
प्रलय की बातों पर यकीन करने वाले लोगों के अनुसार 26 साल में इस दिन पहली बार सूर्य अपनी आकाश गंगा के केंद्र की सीध में जाएगा, जिस कारण पृथ्वी बेहद ठंढ़ी पड़ जाएगी, और फिर शुरू हो जाएगा महाविनाश।
हिंदी ब्लागों पर जहां इस तरह की अफवाहों को बल मिल रहा है वहीं अग्रेजी के ब्लाग्स पर इसे कोरा बकवास करार दिया जा रहा है।
हालांकि तमाम प्रमुख वैज्ञानिक प्रलय संबंधी आशंकाओं को पहले ही खारिज कर चुके है। [जागरण.डाटकाम]