चीनी बांध पर सरकार नहीं चाहती बवाल

 
Nov 04, 11:10 pm

नई दिल्ली [मुकेश केजरीवाल],

चीन में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाए जाने की खबरों को ले कर मचे तमाम हंगामे के बावजूद सरकार इसे फिलहाल ज्यादा तूल नहीं देना चाहती। चीन के साथ इस मामले को फिर से उठाने से पहले केंद्र तय कर लेना चाहता है कि क्या वाकई चीन के निर्माण से भारत में इस नदी की धारा प्रभावित होती है? जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने बुधवार को 'दैनिक जागरण' से कहा कि इस मामले पर चीन का विरोध तभी किया जाएगा, जब वह जलधारा मोड़ रहा हो या फिर कोई बड़ा जलाशय बना रहा हो।

बंसल के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र नदी से 79 अरब क्यूबिक मीटर [बीक्यूएम] पानी की जो धारा हमारे देश में आती है, उसे वो रोकते नहीं हैं तो हमें इसके तट पर हो रहे उनके किसी निर्माण से ऐतराज नहीं। हमें ऐतराज तब होगा, जब वे इसकी जलधारा को बड़े स्तर पर रोकते हैं या मोड़ कर कहीं और ले जाने की कोशिश करते हैं। नदी के बहाव को नुकसान पहुंचाए बिना कोई छोटा बांध खड़ा करते हैं तो कोई दिक्कत की बात नहीं है।

नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी की ओर से चीन के जांगमु में ब्रह्मपुत्र नदी पर हो रहे निर्माण कार्य की जानकारी मिलने के बाद से इसके स्तर के बारे में विस्तृत छानबीन की जा रही है। इस एजेंसी ने अपनी सेटेलाइट तस्वीरों के आधार पर नए मकान बनने, खुदाई होने और ट्रकों की आवाजाही की तस्दीक की है। इसकी रिपोर्ट मंगलवार को कैबिनेट सचिव के नेतृत्व वाली सचिवों की समिति के सामने भी रखी जा चुकी है। समिति ने चिंता जताते हुए इस पर राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर फैसले की जरूरत बताई है।

ब्रह्मपुत्र पर हो रहे इस तरह के निर्माण से भारत की चिंता इसलिए भी लाजिमी है, क्योंकि देश के कुल जल संसाधन का 30 फीसदी इसी नदी से हासिल होता है और ऊर्जा मंत्रालय ने सिर्फ उत्तर-पूर्व के लिए जिन 226 बड़े बांधों के लिए संभावित स्थल चिह्नित किए हैं, उनमें से अधिकांश ब्रह्मपुत्र पर ही हैं। जल संसाधन मंत्रालय के ब्रह्मपुत्र बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अगले 50 साल के दौरान इस नदी पर बनने वाली जल विद्युत परियोजनाओं के जरिए 99,256 मेगावाट बिजली तैयार की जानी है।

इस तरह एक ही बार में बड़े स्तर पर नदी जल को रोके जाने से रास्ते में पड़ने वाले इलाके सुखाड़ की चपेट में आ जाएंगे। इन इलाकों की खेती बुरी तरह प्रभावित हो जाएगी। इससे पर्यावरण संबंधी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। भू जल स्तर को तो नुकसान पहुंचेगा ही।

विदेश सचिव ने याद दिलाया चीन का वचन

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो

विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस मामले में बुधवार को एक बार फिर से चीन को उसकी ओर से दिलाए गए भरोसे की याद दिलाई। राव ने कहा, 'यह मामला चीन के साथ एक बार नहीं, बल्कि कई बार उठाया जा चुका है। चीन ने लगातार इस बात से इन्कार किया है कि वो इस तरह की कोई गतिविधि कर रहा है।' थाइलैंड में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले माह अपने चीनी समकक्ष वेन जियाबाओ से मुलाकात में भी ब्रह्मपुत्र पर बांध का मसला उठाया था। सफाई में चीनी नेता ने ऐसे किसी भी निर्माण से इन्कार ही किया था। इसके बाद बेंगलूर में विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने अपने चीनी समकक्ष यंग जिएची से भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी और उनसे यही भरोसा हासिल किया था।




लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(9) वोट का औसत

average:4.333334
Saving...
    शीर्षकों को अपने "मेरा याहू " पृष्ट पर शामिल करें
  • राजनीति
    Add to My Yahoo! xml
  • अपराध
    Add to My Yahoo! xml
  • दुर्घटना
    Add to My Yahoo! xml
  • आतंकवाद
    Add to My Yahoo! xml
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2009 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित