
बेंगलूर। चंद्रयान-2 अभियान भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों में नया सोपान स्थापित करेगा। यह अभियान 2012-13 तक पूरा हो जाएगा। इससे चंद्रमा पर पाए जाने वाले खनिज तत्वों के विश्लेषण और धरती के प्राकृतिक उपग्रह के भूभाग के नक्शे तैयार करने में मदद मिलेगी।
चंद्रयान परियोजना के निदेशक डा. एम अन्नादुरई ने विश्वेसरैया कालेज आफ इंजीनियरिंग में छठे राष्ट्रीय छात्र सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि 425 करोड़ रुपये की परियोजना 2012-13 तक पूरी हो जाएगी। चांद के चक्कर लगाने वाले चंद्रयान-1 के विपरीत चंद्रयान-2, चांद की सतह पर उतरेगा।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 में एक अंतरिक्ष यान एक लैंडिंग प्लेटफार्म और दो मून रोवर्स [एक भारत से और एक रूस से] होंगे जो चांद की सतह पर उतरेंगे और पहियों पर चलेंगे। रोवर्स चांद की मिट्टी या चट्टानों के नमूने उठाएंगे। रासायनिक विश्लेषण करेंगे और विवरण ऊपर चक्कर लगा रहे यान को भेजेंगे।
चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 के परियोजना निदेशक अन्नादुरई ने कहा कि चंद्रमा पर जाने वाले 70वें उपग्रह चंदयान-1 ने चांद पर पानी खोजकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि 386 करोड़ रुपये की चंद्रयान-1 परियोजना को पूरा होने में साढ़े चार साल लगे थे जिसने छह टेराबाइट डाटा उपलब्ध कराया जिसके अध्ययन में वैज्ञानिकों को तीन साल लगेंगे।
अन्नादुरई ने चंद्रयान-1 की सफलता का श्रेय तीन हजार वैज्ञानिकों की टीम को दिया जिसने परियोजना पर लगातार काम किया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान [आईआईटी] के बारे में उन्होंने कहा कि आप सब अपने काम और टीम वर्क से आईआईटीयन बन सकते हो। मेरे लिए आईआईटी का यही मतलब है।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशन ने साबित किया कि भारत अपने अनुसंधान से आश्चर्यजनक काम कर सकता है। अन्नादुरई ने कहा कि आज के छात्र नवनिर्माण के जरिए 2020 में विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं।