
नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। आमतौर पर सर्दियों के सुहाने मौसम का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। और हो भी क्यों न, यह मौसम धूप की तपिश से राहत जो देता है। लेकिन ठंड का मौसम सभी लोगों खासकर बच्चों के लिए खुशगवार हो यह जरूरी नहीं है। डाक्टरों के मुताबिक सर्दियों में कम तापमान व वातावरण में आर्द्रता का उच्च स्तर बच्चों में सांस की तकलीफ [एक्यूट रेसीपिरेटरी सिंड्रोम-एआरआई] बढ़ जाती है।
शोध के मुताबिक सर्दियों के मौसम में भारत के 50 फीसदी से ज्यादा बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, कफ व अस्थमा जैसी समस्याएं सामने आती हैं। बेंगलूर स्थित लेकसाइड मेडिकल सेंटर के शोध में कहा गया है कि ठंड के दौरान बच्चों में सांस की परेशानी के 50 फीसदी आपात मामले सामने आते हैं। वहीं कोलकाता सेंटर फार एनवायरमेंट स्टडी द्वारा किए गए शोध में सर्दी के दौरान कोलकाता में 70 फीसदी व दिल्ली के 65 फीसदी बच्चों में सांस की तकलीफ देखी गई।
क्यों होती है तकलीफ
सांस की तकलीफ के लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं। दिल्ली के मैक्स अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया, 'गाड़ियों से निकलता धुआं सांस की तकलीफ का एक प्रमुख कारण होता है। गाड़ियों के धुएं में मौजूद सल्फर डाइआक्साइड फेफड़ों में जलन पैदा करता है। ठंड में वातावरण में आर्द्रता बढ़ने से यह समस्या और बढ़ जाती है।'
मोहाली के फोर्टिस अस्पताल के डा. सुनील अग्रवाल के मुताबिक 'हमारे यहां 5 साल की उम्र के अधिकांश बच्चे मध्यम स्तर के अस्थमा से पीड़ित हैं। इसकी वजह वातावरण में परागकणों का उच्च स्तर है।'
बच्चों को क्यों होती है तकलीफ
ठंड में पांच साल तक के बच्चों में अस्थमा की तकलीफ के मामले ज्यादा सामने आते हैं। डाक्टरों की राय में बच्चों की श्वास नलिका संकरी होती है। इसके चलते छोटे कण भी उनमें सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकते हैं।
क्या है निदान
-थोड़ी भी तकलीफ होने पर सुबह स्कूल जाते वक्त बच्चे को स्वेटर जरूर पहनाएं।
-बच्चे के साथ हमेशा दवा जरूर रखें। स्कूल में भी बच्चे की तकलीफ के बारे में बता दें।
-बच्चे को धूल, भीड़भाड़ वाले माहौल से बचाएं।
-घर में साफ-सफाई रखें। गद्दे-तकियों को हर पंद्रह दिन में धूप में रखें। ऐसा करने से संक्रमण की संभावना कम हो जाएगी।