नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। उच्च शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2020 तक 27 हजार से अतिरिक्त शिक्षा संस्थानों की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद भी मात्र 30 फीसदी युवाओं को उच्च शिक्षा उपलब्ध हो पाएगी। यही नहीं, सरकार संसाधनों की कमी को देखते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सर्वशिक्षा अभियान की तर्ज पर किसी योजना पर फिलहाल विचार नहीं कर रही है। ये खुलासे शनिवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में हुए।
सांसदों द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के बावजूद गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समुचित उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने सांसदों को भरोसा दिया कि यशपाल समिति और राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के सुझाव के अनुसार उच्च शिक्षा की निगरानी के लिए प्रस्तावित आयोग गुणवत्ता को बनाए रखने में सक्षम होगा। सिब्बल ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा में सर्वशिक्षा अभियान की तरह कार्यक्रम शुरू नहीं किया जा सकता, लेकिन जरूरत के अनुसार सरकार नए शिक्षण संस्थान खोलने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही नए शिक्षण संस्थान खोलने के लिए राज्य सरकारों को प्रोत्साहन पैकेज भी दिया जा रहा है।
मौजूदा उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी के संबंध में सांसदों के सवाल का जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार ने उच्च शिक्षा में लगे शिक्षकों के वेतन में खासी बढ़ोतरी की है, ताकि अधिक-से-अधिक लोग इसके प्रति आकर्षित हो सकें।