महाराष्ट्र में सामने आया छात्र घोटाला

मुंबई। महाराष्ट्र में अब एक नया घोटाला सामने आया है। सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त विद्यालयों में एक लाख चालीस हजार छात्रों का नामांकन फर्जी होने का पता चला है। छात्रों की अधिक संख्या दिखाकर विद्यालय चलाने वालों ने सरकार की बड़ी राशि हड़प ली है। यह राशि कई सौ करोड़ रुपये तक हो सकती है। प्रदेश का शिक्षा विभाग अब इन विद्यालयों की जांच करने जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार विद्यालयों को प्रतिवर्ष करीब 27 हजार करोड़ रुपये की सहायता देती है।

एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी छात्रों का मुद्दा शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्दा ने बुधवार को कैबिनेट के समक्ष रखा।

नांदेड़ जिले में पिछले एक साल से यह पायलट परियोजना शुरू की गई थी। शिक्षा विभाग तब कार्रवाई शुरू की जब उसने सहायता के लिए आवेदन देने वाले और सहायता प्राप्त संबंधित विद्यालयों से वास्तविक छात्रों का ब्योरा मांगा। इसके बाद पता चला कि उन विद्यालयों ने अपने यहां बहुत सारे फर्जी नामांकन कर रखे हैं।

शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक कपिल पाटिल ने कहा कि हमारा मानना है कि फर्जी छात्रों का नाम दर्ज करने का प्रचलन शहरी केंद्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों और आवासीय विद्यालयों में अधिक है। क्योंकि शहरी क्षेत्रों में निगरानी की प्रणाली बहुत सख्त है।

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वान ने मीडिया से कहा कि नांदेड़ की रिपोर्ट देखने से लगता है कि फर्जी छात्रों की संख्या लगभग बीस फीसदी तक हो सकती है। पूरे महाराष्ट्र में 1.4 करोड़ छात्र सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। सरकारी अनुदान का एक बड़ा हिस्सा शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन पर खर्च होता है। इसके अलावा यह राशि छात्रों की ड्रेस, पुस्तकों और मध्याह्न भोजन पर खर्च होती है।

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