नई दिल्ली। यहां मदरसा बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को लेकर देश के मुस्लिम संगठनों में दो फाड़ नजर आ रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड एवं कुछ संगठन इस कवायद का पुरजोर विरोध कर रहे हैं, तो कई संगठनों का मानना है कि शहर में मौजूद 200 से अधिक छोटे-बड़े मदरसों की बेहतरी के लिए यह उचित कदम होगा।
पिछले दिनों 'मुस्लिम वेलफेयर ट्रस्ट' के तत्वाधान में कई मदरसा संचालकों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाकात की थी। उस वक्त शीला ने मदरसा बोर्ड के गठन को लेकर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग से बात की थी और आयोग ने भी इसके लिए अपनी मंजूरी दी थी।
गठन की कवायद के बीच सोमवार को मुस्लिम संगठन 'ऑल इंडिया मजलिस ए मुशावरत' के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम उलेमाओं ने शीला से मुलाकात कर मदरसा बोर्ड के गठन के प्रयास पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद से इस मसले पर मुस्लिम संगठन दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं और दिल्ली सरकार भी असमंजस की स्थिति में आ गई है।
इस संदर्भ में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सफदर खान ने कहा कि हम चाहते थे कि दिल्ली में मदरसा बोर्ड बने, लेकिन अब कुछ संगठनों ने इसका विरोध किया है। हम विरोध और पैरवी करने वाले दोनों पक्षों के साथ बातचीत करेंगे और फिर किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता अब्दुल रहीम कुरैशी का कहना है कि मदरसों के मामले में सरकार को दखल देने की कोई जरूरत नहीं हैं। हम मदरसा बोर्ड के गठन की किसी भी कवायद का जोरदार विरोध करेंगे।
मदरसा बोर्ड के गठन की कवायद का विरोध कर रहे मशावरत के महासचिव इलियास मलिक ने कहा कि हम मदरसा बोर्ड नहीं चाहते क्योंकि इससे मदरसे खत्म हो जाएंगे। मदरसे दीनी तालीम के लिए बने हैं। वैसे इनमें सिर्फ चार फीसदी बच्चे जाते हैं, बाकी बच्चे दूसरे स्कूलों में पढ़ते हैं। सरकार को मदरसों पर नियंत्रण करने की बजाय उन संस्थानों में सुधार करना चाहिए, जहा मुसलमानों के 96 फीसदी बच्चे पढ़ते हैं।
इस बीच ऑल इंडिया उलेमा एवं मशायक बोर्ड ने मदरसा बोर्ड बनाए जाने की खुलकर पैरवी की है। इसके प्रवक्ता बाबर अशरफ ने कहा कि हमें यह नहीं समझ आता कि कुछ संगठन मदरसों में आधुनिक शिक्षा का विरोध क्यों कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि मदरसों में पढ़ने वाले च्च्चे भी रोजगारोन्मुखी बनें। धार्मिक शिक्षा के साथ च्च्चों के विकास के लिए आधुनिक शिक्षा भी जरूरी है।
दिल्ली में मदरसा बोर्ड के गठन के लिए आवाज उठाने वाले मुस्लिम वेलफेयर ट्रस्ट के निदेशक मजाज मुंगेरी का कहना है कि आने वाले वक्त में वह इसके लिए वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग का रुख करेंगे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में 200 से अधिक मदरसे हैं, जिनकी स्थिति बदहाल है। मदरसों की स्थिति सुधारने और इनमें पढ़ने वालच् बच्चों के भविष्य के लिए मदरसा बोर्ड का गठन जरूरी है। इसके लिए हम अपना प्रयास जारी रखेंगे।
वैसे, केंद्र की ओर से केंद्रीय मदरसा बोर्ड के गठन की कवायद जब शुरू हुई थी तो कई मुस्लिम संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया था। इस कारण यह योजना खटाई में पड़ गई थी।
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