नई दिल्ली। प्रस्तावित औषधि नीति के चलते दवा की कीमतें कहीं आसमान न छूने लगें, इसके मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सतर्क रहने को कहा है। शीर्ष न्यायालय ने गुरुवार को सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि दवा की कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए, क्योंकि इससे आम आदमी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसडी मुखोपाध्याय की पीठ ने कहा, 'कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए। यह आशंका जताई जा रही है कि दवा की कीमतें बढ़ जाएंगी। नई नीति के नाम पर कीमतें न बढ़ाई जाए क्योंकि दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में भारत में हमारे पास अधिक उपभोक्ता हैं।' पीठ ने ड्रग एक्शन नेटवर्क और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका [पीआइएल] पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीआइएल में कहा गया है कि वर्तमान में औषधि [मूल्य नियंत्रण] आदेश-1995 के तहत केवल 78 दवाओं को ही रखा गया है। जिसके कारण बाकी दवाइयों के दाम आम आदमी की पहुंच के बाहर हो गए हैं। प्रस्तावित औषधि मूल्य नीति से तो दवा की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। पीठ ने इस मामले पर आगे की सुनवाई 17 जनवरी तक के लिए मुल्तवी कर दी।
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