
जयपुर। जयपुर के सीतापुरा इलाके में इंडियन आयल कारपोरेशन [आईओसी] डिपो से रविवार दो शव और मिलने के साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर दस [10] हो गई है।
पुलिस महानिरीक्षक [प्रथम] जयपुर बी एल सोनी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि टर्मिनल परिसर से दो शव और मिले हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मिले दो शव संभवत: लापता तीन कर्मचारियों में से हैं।
इधर जयपुर जिला कलेक्टर कुलदीप रांका के अनुसार रविवार सुबह जीनस फैक्ट्री में आग पर काबू पा लिया गया है जबकि आईओसी डिपो में चार दिन से लगी आग संभवत: आज बुझ जाएगी। उन्होंनें बताया कि टर्मिनल से सटी जीनस फैक्ट्री में सुबह लगी आग पर अग्निशमन दल ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद काबू पा लिया।
उन्होंनें बताया कि टर्मीनल में धधक रही आग से जीनस फैक्ट्री में आग लगी थी। उन्होंनें बताया कि आग बुझने के साथ ही बचाव कार्य तेजी से शुरू करने के लिए सभी प्रबंध कर लिए गए हैं। उन्होंनें बताया कि जमीनी आग को फैलने से रोकने के लिए सेना की मदद से पहले ही टर्मिनल और आबादी तथा टर्मिनल और निकट में स्थित अन्य तेल कंपनियों के डिपो के बीच खाईयां खोदी जा चुकी हैं जिससे आग आगे नहीं फैले।
उन्होंनें बताया कि अस्पताल में भर्ती तीस घायलों की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। आग से निकटवर्ती गांवों और औद्यौगिक इलाके में हुए नुकसान का आंकलन का काम कल से शुरू कर दिया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी यशवन्त शर्मा के अनुसार आईओसी डिपो में लगी आग से जयपुर-सवाई माधोपुर रेल मार्ग पर आज चौथे दिन भी यातायात बंद रहा। उन्होंनें बताया कि इस मार्ग से जाने वाली सभी बारह यात्री रेलगाड़ियां परिवर्तित मार्ग से भेजी जा रही है। उन्होंनें कहा कि स्थिति की समीक्षा कर इस मार्ग पर यातायात शुरू करने का निर्णय किया जाएगा। लेकिन आईओसी डिपो में लगी आग पर काबू पाने तक रेल यातायात की यही स्थिति रहेगी।
राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम सूत्रों के अनुसार जयपुर से कोटा मार्ग पर जाने वाली बसों को सांगानेर मालपुरा मार्ग से चलाई जा रही है। उधर आईओसी डिपो से करीब दो किलोमीटर के दायरे में बाजार, औद्यौगिक इकाईयों में कामकाज चार दिन से बंद है।
गौरतलब है कि गुरूवार की सुबह आईओसी टर्मीनल में लगी आग से अब तक आठ लोग मारे जा चुके हैं और करीब डेढ़ सौ से अधिक घायल हो गए हैं। आग पर काबू पाने के लिए सेना दिल्ली, मुंबई, मध्य प्रदेश, गुजरात मथुरा रिफाइनरी से आए आपदा विशेषज्ञ जिला प्रशासन की मदद कर रहे हैं।