नई दिल्ली। गोधरा बाद के गुजरात दंगों को लेकर पूरी दुनिया में आलोचना का शिकार रहे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को टेलीविजन सक्षात्कार के दौरान तमतमा गए। गुस्से पर नियंत्रण के लिए उन्होंने एक गिलास पानी पिया। माइक को हटवाया और साक्षात्कार अधूरा छोड़कर उठ गए। वजह यह थी कि 'गुजरात दंगों का भूत' इस साक्षात्कार में भी उनके सामने बार-बार आ जा रहा था।
साक्षात्कार सीएनएन-आईबीएन के वरिष्ठ पत्रकार करन थापर कर रहे थे। करन ने मोदी से जानना चाहा कि क्या कभी गुजरात दंगों के लिए माफी मांगी है। उनकी मुसलिम विरोधी छवि को लेकर करन ने कई बार सवाल दाग दिए। फिर क्या था, सख्त मिजाज माने जाने वाले नरेंद्र मोदी सख्त हो गए। पहले तो उन्होंने पानी मांगा, फिर अपनी कमीज से माइक हटाया और कहा, अब बस। जिन तीन-चार सवालों का जवाब दे दिया है, उसी से संतोष कीजिए। मोदी ने सपाट लहजे में कह दिया, वह साक्षात्कार और जारी नहीं रख सकते।
मोदी ने करन से कहा, 'दोस्ती बरकरार रहनी चाहिए। मुझे खुशी होगी। आप यहां आए, मैं खुश हुआ और आपका आभारी हूं। यह आपका नजरिया है, इसे व्यक्त करते रहिए।'
इससे पहले करन थापर ने मोदी से पूछा था, क्यों नहीं मानते कि आपकी सरकार को मुसलमानों की सुरक्षा के लिए और ज्यादा करना चाहिए था। मोदी बमुश्किल बोले, मुझे जो भी कहना था, मैंने उस समय कह दिया था। मेरे बयानों से पता लगा सकते हैं।
साक्षात्कार छोड़कर उठने से पहले भाजपा के इस फायरब्रांड नेता ने कहा कि उन्होंने कभी छवि सुधारने जैसे प्रयास नहीं किए। उन्होंने बताया कि महज दो-तीन लोग ही ऐसे हैं, जिन्होंने उन पर मुसलिमों के प्रति पूर्वाग्रस्त होने का आरोप लगाया था। मोदी ने कहा, मैं अपने काम में व्यस्त हूं। मैं गुजरात के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित हूं। मैंने कभी भी अपनी छवि को लेकर बात नहीं की। अपनी छवि के लिए कभी एक मिनट भी बरबाद नहीं किया। करन का एक और सवाल था, सक्षम प्रशासक होने के बावजूद 'जनसंहारक' क्यों कहा जाता है। मोदी का जवाब था, मेरी राय में यह कहना उचित नहीं है। दो-तीन लोग हैं जो इस लहजे में बात करते हैं। मैंने हमेशा कहा है कि ईश्वर उनका भला करें।
मोदी ने इन रिपोर्टो पर भी आपत्तिजताई कि सुप्रीम कोर्ट ने दंगों के संदर्भ में उनकी तुलना आधुनिक काल के 'नीरो' से की थी। मोदी ने कहा कि अदालत के लिखित फैसले में ऐसी कोई बात नहीं थी।
यह साक्षात्कार ऐसे समय किया गया जब गुजरात दंगों को सामूहिक नरसंहार करार देने के बयान के लिए भाजपा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से खफा है।