नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। करीब दो माह पहले एयरपोर्ट पर लालकृष्ण आडवाणी और राहुल गांधी की भेंट पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अब शुरू हुए हैं। राहुल ने उस मुलाकात को व्यक्तिगत बताते हुए उसे सार्वजनिक करने के लिए आडवाणी पर निशाना साधा तो भाजपा ने कांग्रेस महासचिव पर करारे कटाक्ष मारे।
गौरतलब है कि करीब दो माह पहले आडवाणी-राहुल की मुलाकात एयरपोर्ट पर हुई थी। उस भेंट का पूरा ब्यौरा भाजपा की तरफ से सार्वजनिक कर दिया गया था। उसके तहत आडवाणी ने राहुल को नसीहत दी थी कि 'कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे से शत्रु की तरह नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की तरह पेश आएं।'
इस बारे में बुधवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली के आवास पर पहली बार मुंह खोला। पत्रकारों ने मोइली के घर पर राहुल से सवाल पूछा तो उनका जवाब था कि 'मेरी यह आदत नहीं है कि मैं निजी बातचीत को मीडिया के सामने जाहिर करूं।'
भाजपा ने राहुल के इस बयान को आडवाणी पर निशाना माना और इस पर तीखी प्रतिक्रिया भी दी। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'यह कोई गुप्त या संवेदनशील बैठक नहीं थी कि बाहर बात न की जाए। एयरपोर्ट पर दोनों की अचानक मुलाकात हुई थी और आडवाणी ने उसी परिप्रेक्ष्य में राजनीतिक शत्रु न समझने वाली बात कही थी।' इसके आगे रविशंकर प्रसाद ने कटाक्ष मारा कि 'अगर राहुल भी अगर ऐसा समझते हैं तो अच्छी बात है, लेकिन उस स्थिति में मौत के सौदागर जैसी शब्दावली नहीं आनी चाहिए।' भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने भी राहुल के बयान पर इतना ही कहा कि 'यह कोई न्यूक्लियर सीक्रेट की चर्चा तो नहीं हो रही थी कि बाहर बात न की जा सके।'
भाजपा के इस रुख को कांग्रेस ने आपत्तिजनक बताया। कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने कहा कि 'भाजपा खुद को संस्कृति वाली पार्टी कहती है, लेकिन जो रविशंकर ने कहा है, वह उनकी कुसंस्कृति दर्शाता है। राहुल ने आडवाणी के लिए कुछ नहीं कहा, बल्कि सिर्फ यही कहा कि वह व्यक्तिगत भेंट को सार्वजनिक नहीं करते। उन्होंने आडवाणी के लिए कुछ गलत या सही कहा ही नहीं, फिर बेवजह वितंडावाद खड़ा करना भाजपा की मानसिकता का ही परिचायक है।'