करार पर सरकार खतरे में नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत अमेरिका एटमी असैन्य समझौते पर मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] द्वारा नए सिरे से चेतावनी जारी करने को ज्यादा तूल नहीं देते हुए कहा कि इसे मनमोहन सरकार के लिए खतरे की घंटी के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख वीरप्पा मोइली ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पिछले चार वर्ष से देश में राजनीतिक स्थिरता कायम रखने में सहयोग कर रहे वामदल सरकार को गिराने जैसा कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि परमाणु करार के बारे में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] और वामदलों की संयुक्त समिति की बैठक जल्द बुलाने की वामदलों की मांग में कुछ भी गलत नहीं है। वामदल पहले भी शंकाएं उठाते रहे हैं जिनका सरकार निवारण करती रही है।

मोइली ने एटमी करार की वकालत करते हुए कहा कि हमें कांग्रेस के एजेंडे के रूप में नहीं राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत और सौदेबाजी के बाद हम इतना अच्छा करार करने में सफल हुए हैं। इससे भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु सहयोग का रास्ता खुल जाएगा।

उन्होंने कहा कि घटक तथा समर्थक दलों की सहमति से ही सरकार इस पर आगे बढ़ रही है और हमने काफी लंबा रास्ता तय कर लिया है। उन्होंने कहा कि देश के अब तक के इतिहास में किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते को रद्द नहीं किया गया है यदि इस करार के साथ ऐसा किया गया तो देश की प्रतिष्ठा को आंच आएगी।

मोइली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से अभी बात चल रही है। इसे देखते हुए इस पूरी प्रक्रिया की बीच में समीक्षा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस करार पर सरकार न केवल घटक और समर्थक दलों को बल्कि संसद को विश्वास में लेकर आगे बढ़ रही है तथा किसी से कुछ छिपा नहीं रही है। हाइड एक्ट का हौवा खड़ा किए जाने को उन्होंने गलत बताते हुए कहा कि अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर तक ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कानून वहां के प्रशासन और विधायिका का आंतरिक मुद्दा है। भारत सिर्फ द्विपक्षीय 123 करार से बंधा हुआ है।

कांग्रेस का मानना है कि मनमोहन सरकार से गिराने से वामदलों कोई राजनीतिक लाभ नहीं होने वाला है। यदि वह एटमी करार को लेकर ऐसा कदम उठाती है तो उसे जनता को यह समझाना होगा कि यदि वह करार नहीं चाहती तो इसे इतने आगे तक क्यों बढ़ने दिया। उसके इस कदम से भाजपा को सत्ता में आने का भी मौका मिल सकता है जो मौजूदा करार से आधी सुविधाएं मिलने पर भी समझौता करने को तैयार थी।

पार्टी का कहना है कि क्या वाम दल नहीं चाहते कि देश के किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को प्रचुर बिजली मिले जिसमें यह करार बहुत मददगार साबित होगा।




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