नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की भाजपा में वापसी की अटकलों के बीच उनकी भारतीय जनशक्ति पार्टी [भाजश] में बगावत हो गई है। पार्टी के छह प्रदेशाध्यक्षों ने एक बैठक में भारती के नेतृत्व को नकार कर प्रहलाद पटेल को अपना नया नेता चुन लिया।
पार्टी के पूर्व महासचिव पटेल की अध्यक्षता में यहां हुई बैठक में भाजश की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष उमेश माथुर, उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय वर्मा, बिहार इकाई के अध्यक्ष अविनाश कुमार, छत्तीसगढ इकाई के अध्यक्ष राजीव लोचन श्रीवास्तव, गुजरात इकाई के अध्यक्ष सुनील भाई ओझा और चंडीगढ़ इकाई के अध्यक्ष एल के खुराना ने भारती पर मनमाने ढंग से पार्टी चलाने और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनके नेतृत्व को मानने से इंकार कर दिया।
पटेल ने बैठक के बाद कहा कि भारती द्वारा चंद दिनों पूर्व संघप्रिय गौतम को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा से पार्टी नेताओं के सब्र का बांध टूट गया और उन्हें दिल्ली में आकर यह निर्णय लेना पड़ा। पटेल ने कहा कि वह चुनाव आयोग को भी पार्टी नेताओं के इस निर्णय की जानकारी देंगे।
पटेल के साथ उपस्थित पदाधिकारियों ने भारती की कार्यशैली को उनके प्रति अपमानजनक करार देते हुए रोष पूर्ण शब्दों में कहा कि उमा जी का वन मैन शो नहीं चलेगा। उन्होंने भारती पर भाजश को खत्म करने का आरोप लगाया और भाजपा में वापसी की भारती की कोशिशों की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने ऐलान किया कि वह सुराज, शुचिता और स्वाभिमान आदि सिद्धांतों का ध्वज लेकर भाजश में ही संघर्ष जारी रखेंगे। पटेल ने कहा कि भारती पिछले कई माह से पार्टी संविधान का उल्लंघन कर रही है। गुजरात चुनाव में प्रत्याशी खड़े करना, फिर वापस लेना। मध्य प्रदेश में खरगान लोकसभा एवं सांवेर विधानसभा उपचुनावों में पार्टी के उम्मीदवार वापस लेना, ऐसे फैसले थे जिन पर उन्होंने पार्टी के नेताओं को गुमराह किया तथा भाजपा में वापसी की खबरें आने से भी उनकी विश्वसनीयता घटी है।
पटेल ने कहा कि 18 दिसंबर 2007 को पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में 13 में से 10 प्रदेशाध्यक्षों ने उनके खिलाफ वोट दिया था जबकि मध्यप्रदेश के अलावा दो अन्य प्रदेशाध्यक्षों ने उनके पक्ष में मतदान किया था। लेकिन पार्टी के हित का विचार कर भारती के असंवैधानिक निर्वाचन को मान कर उन्हें अध्यक्ष घोषित कर दिया गया था। इस पर भारती ने भविष्य में सभी निर्णय पार्टी कोर ग्रुप से पूछकर ही करने का वादा किया था लेकिन उन्होंने कभी भी अपना वादा नहीं निभाया।
गौरतलब है कि भारती ने पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद नई कार्यकारिणी घोषित की थी, जिसमें पटेल को महासचिव पद से हटाने के साथ कार्यकारिणी से भी अलग कर दिया था।
इस बीच भारती की भाजपा में इसी सप्ताह वापसी होने की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी में वापसी के बाद उन्हें मध्य प्रदेश का प्रभार दिया जा सकता है।