
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। महंगाई को लेकर संप्रग घटकों के बीच ही घमासान शुरू हो गया है। इस मसले पर कृषि मंत्री शरद पवार को घेरने के कांग्रेस के दांव के जवाब में राष्ट्रवादी कांग्रेस ने गुरुवार को सोनिया गांधी पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार में तो पूरी तरह गठबंधन धर्म निभा रहे हैं लेकिन कांग्रेस नेतृत्व अपने सहयोगियों को नीचा दिखा रहा है।
पलटवार में एनसीपी इतने पर ही नहीं रुकी बल्कि उसने तीसरे मोर्चे की सरगर्मी में अपनी दिलचस्पी जाहिर कर भी कांग्रेस को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। एनसीपी महासचिव व मुख्य प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने तीसरे मोर्चे के लिए वामदलों की पहल का स्वागत करते हुए दो टूक कहा कि कांग्रेस और भाजपा से अलग एक तीसरे राजनीतिक धु्रव की जरूरत है।
दरअसल महंगाई का ठीकरा पवार के सिर फोड़ने की कांग्रेस की कोशिशों से एनसीपी में बौखलाहट है। इसीलिए पार्टी ने सोनिया गांधी की गठबंधन कार्यशैली पर सवाल उठाया है। तीसरे मोर्चे में दिलचस्पी दिखाकर एनसीपी यह भी जताना चाहती है कि कांग्रेस उसकी मजबूरी नहीं है। यानी बड़ी पार्टी होनी की वजह से वह सहयोगियों को नीचा दिखाने की कोशिश न करे। एनसीपी का कहना है कि कांग्रेस ऐसा बर्ताव कर रही है जैसे अकेले उसकी ही सरकार है।
एनसीपी के हमले से हतप्रभ कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने कहा कि इस तरह के आरोप गठबंधन को सहज तरीके से चलाने में मददगार नहीं होंगे। उन्होंने सफाई दी कि कांग्रेस ने पवार को महंगाई का दोषी नहीं ठहराया है। यह मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी है। मोइली के अनुसार जब सरकार ठीक से चल रही है तो गठबंधन धर्म का पालन न करने का आरोप गले नहीं उतरता।
इधर, पवार के बीसीसीआई में व्यस्त रहने और महंगाई पर ध्यान नहीं देने के कटाक्ष पर एनसीपी महासचिव त्रिपाठी ने कहा कि आर्थिक नीतियों का निर्धारण वित्तमंत्री करते हैं, कृषि मंत्री नहीं। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई में पवार की सक्रियता को लेकर अंगुली उठाना कांग्रेस की सामंतवादी और संकीर्ण सोच को दर्शाता है। उनका स्पष्ट इशारा था कि महंगाई के लिए तो कांग्रेस दोषी है, वह तो पवार हैं जिन्होंने किसानों की कर्ज माफी के फैसले की पूरी बुनियाद रखी।