नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सोनिया गांधी पर राष्ट्रवादी कांग्रेस के हमलों से बौखलाई कांग्रेस ने परोक्ष तौर पर कृषि मंत्री शरद पवार की धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है। मेघालय और नगालैंड में भाजपा के साथ एनसीपी के सरकार में शामिल होने के मद्देनजर पार्टी ने एनसीपी को इस पर घेरा। साथ ही दोनों राज्यों में भाजपा से दोस्ती पर एनसीपी से सफाई मांगी।
गौरतलब है कि एनसीपी ने बृहस्पतिवार को संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की कार्यशैली से असंतोष जाहिर करते हुए कांग्रेस पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया था। इसके जवाब में ही कांग्रेस ने शुक्रवार को मेघालय में भाजपा-एनसीपी गठजोड़ के बहाने धर्मनिरपेक्षता को लेकर पवार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि एनसीपी का आरोप गलत ही नहीं कुछ ज्यादा है।
गठबंधन धर्म नहीं निभाने की बात भी पूरी तरह गलत है क्योंकि मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में एनसीपी के साथ कांग्रेस का चुनाव पूर्व कोई गठबंधन ही नहीं था। सिंघवी ने कहा कि आरोप लगाने से पहले एनसीपी को इस मुद्दे पर आत्मचिंतन करना चाहिए कि मेघालय में वह भाजपा के साथ सत्ता सुख भोग रही है। धर्मनिरपेक्षता की बात करने और इसी मुद्दे पर केंद्र तथा महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ सरकार बनाने वाली एनसीपी को विश्वासघात का आरोप लगाने से पहले इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए कि धर्मनिरपेक्षता को लेकर उसके मानदंड क्या हैं? केंद्र और महाराष्ट्र में धर्मनिरपेक्षता की एक और मेघालय में दूसरी परिभाषा तो नहीं हो सकती।
वैसे कांग्रेस भी सैद्धांतिक रूप से भाजपा से परोक्ष या प्रत्यक्ष रिश्ते रखने वाले दलों के साथ किसी तरह का राजनीतिक सहयोग नहीं करने का झंडा बुलंद करती रही है। इस सैद्धांतिक नजरिये की वजह से ही पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी से वह अनचाही दूरी बनाए हुए है। एनसीपी का नगालैंड और मेघालय में उठाया गया कदम कांग्रेस के इस सिद्धांत के खिलाफ है। फिर पार्टी अपनी ओर से इसके संदर्भ में क्या फैसला करेगी? सिंघवी ने कहा कि एनसीपी पहले स्पष्टीकरण दे उसके बाद हम अपना नजरिया साफ करेंगे।