सरकारी दस्तावेजों में भी रामसेतु मानव निर्मित

 
May 07, 09:39 pm

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। रामसेतु तोड़ने का विरोध कर रहे जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने बुधवार को सुप्रीमकोर्ट में कहा कि सरकार के दस्तावेजों में रामसेतु को मानवनिर्मित और हिन्दू विश्वास व इतिहास से जुड़ा माना गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संसद में पेश फोटो संग्रह 'इमेजेज इंडिया' का हवाला दिया जिसमें रामसेतु का उपग्रह से लिया चित्र दिया गया है। इसके मानव निर्मित होने की संभावना जताते हुए पुरातत्व अध्ययन जारी रहने की बात कही गई है।

बुधवार को याचिकाकर्ता सुब्रहमण्यम स्वामी ने सेतुसमुंद्रम परियोजना के लिए रामसेतु को तोड़ने का विरोध करते हुए इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी दस्तावेजों में रामसेतु के मानवनिर्मित होने की संभावना जताई गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत आने वाले अंतरिक्ष विज्ञान विभाग की नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी का सेटेलाइट से लिया गया 'इमेजेस इंडिया' फोटो संग्रह संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया था। इसमें रामसेतु का उपग्रह से लिया गया चित्र भी है। इसके साथ लिखा है कि भारत और श्रीलंका के बीच 30 किलोमीटर का प्राचीन एडम्स ब्रिज है। पुरातत्व अध्ययन से इसके पत्थरों की श्रृंखला 17 लाख पचास हजार साल पहले की पाई गई है। यह मानव निर्मित हो सकता है। इसका पुरातत्व अध्ययन अभी चल रहा है। इसका संबंध धार्मिक ग्रन्थों और इतिहास से बताया गया है। तमिलनाडु सरकार के पर्यटन विभाग ने तमिलनाडु आने के लिए एक विज्ञापन में कहा है कि रामेश्वरम के जल में अब भी राम के चरणकमलों का आशीर्वाद है, क्योंकि यह वह स्थान है जहां वानर सेना ने सीता को मुक्त कराने के लिए लंका पार की थी। यही नहीं, सेतुसमुद्रम कारपोरेशन ने मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में माना है कि रामसेतु हिन्दुओं में पूजनीय है और कारपोरेशन ने इसके दर्शन के लिए 'व्यूइंग गैलरी' बनाने की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि करोड़ों हिन्दुओं के पूजनीय और आस्था वाले स्थान को सरकार तोड़ने पर उतारू है जबकि दिल्ली में कुतुबमीनार के पास एक मकबरा बचाने के लिए एनजीओ और एएसआई की आपत्ति पर मेट्रो रेल का रास्ता बदल दिया गया।

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की आस्था और कानून व्यवस्था का हवाला देकर तमिलनाडु सरकार इसे सही ठहरा सकती है, लेकिन करोड़ो हिन्दुओं की आस्था के स्थान रामसेतु पर अड़ियल रुख अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिन्दू रामसेतु की पूजा करते हैं।

जिस चीज की पूजा की जाती है जरूरी नहीं है कि वहां जाया जाए। लोग सूरज की पूजा करते हैं, लेकिन वहां जाते नहीं हैं। रामसेतु तोड़ना भारतीय दंड संहिता की धारा 295 के तहत दंडनीय अपराध है और कोर्ट इस अपराध को संरक्षण नहीं दे सकता।

असम में ब्रह्मापुत्र नदी के बीच में एक माजुली द्वीप है जो प्राकृतिक है। लेकिन लोगों की आस्था को देखते हुए सरकार ने इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर रखा है। यूनेस्को को इसे विश्व की धरोहरों में शामिल करने के लिए पत्र भी लिखा है। मान्यता है कि इस स्थान पर कृष्ण गोपियों के साथ नृत्य करते थे। रामसेतु से तो बहुत लोगों की आस्था जुड़ी है इसे भी राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। पहले सरस्वती नदी व कृष्ण की द्वारका को पौराणिक किंवदंती माना जाता था। लेकिन अब शोध में सिद्ध हो गया है कि सरस्वती नदी रेत के नीचे बह रही है और समुद्र के अंदर कृष्ण की द्वारका है। ऐसे ही रामसेतु की जांच में भी पाया जा सकता है।




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