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राज का इलाज नहीं सूझ रहा सरकार को

May 08, 02:57 am
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मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। तीन मई को अपने भाषण में गालियों एवं धमकियों की बौछार करनेवाले राज ठाकरे पर कार्रवाई करने का कोई उपाय महाराष्ट्र की देशमुख सरकार को नहीं सूझ रहा है। जबकि राज की पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न स्थानों पर उत्तर भारतीयों के विरुद्ध छिटपुट हिंसा जारी है।

राज ठाकरे ने इस बार अपना भाषण इतनी चालाकी से तैयार किया था कि वीडियो कैमरे लगाकर उनका भाषण टेप करनेवाली पुलिस मशीनरी भी उसमें से गंभीर आरोप तलाशने में चक्कर खाने लगी है। एक ओर पुलिस बिना किसी ठोस आरोप के राज को हाथ लगाने से डर रही है, तो दूसरी ओर उसके राजनीतिक आकाओं को अपने ही सहयोगियों के सामने जवाब देते नहीं बन रहा है। इसकी बानगी मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सामने आ गई, जब गृहमंत्रालय के प्रभारी उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल को उन्हीं की पार्टी के दो वरिष्ठ मंत्रियों अजीत पवार एवं छगन भुजबल के साथ कांग्रेस के मंत्री नारायण राणे ने राज की गिरफ्तारी के मुद्दे पर उनसे जवाब-तलब किया। सूत्रों के अनुसार इस हमले से असहज हुए गृहमंत्री ने मंत्रिमंडल की बैठक में अपने इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी। जिसका बाद में उन्होंने खंडन किया।

राज की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर दूसरे राजनीतिक दल भी दबाव बना रहे हैं। इनमें सबसे आगे हैं समाजवादी पार्टी के मुंबई अध्यक्ष अबू आसिम आजमी। बुधवार को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एएन राय से राज ठाकरे को गिरफ्तार करने की मांग करके लौटे आजमी ने कहा कि उन्हें राज पर उचित कार्रवाई का आश्वासन तो मिला है, लेकिन लगता नहीं कि सरकार राज पर कोई कार्रवाई करेगी। आजमी के अनुसार कांग्रेस और राकांपा की गठबंधन सरकार को लगता है कि यदि उन्होंने राज की गिरफ्तारी का आदेश दिया तो राज को महाराष्ट्रियन समुदाय की सहानुभूति मिलेगी और इन दोनों दलों को मराठी वोटों से हाथ धोना पड़ेगा। यदि राज को यूं ही छोड़ दिया, तो इन्हें मुंबई, ठाणे सहित राज्य में विभिन्न स्थानों पर रह रहे परप्रांतियों के बड़े वर्ग की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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