नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भारतीय राजनीति में 51 साल गुजार चुके वरिष्ठ कांग्रेसी अर्जुन सिंह ने बिना किसी का नाम लिए पार्टी नेतृत्व व विरोधियों पर सलीके से पलटवार किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने के वे कायल नहीं थे। फिर भी उस दौर में उन्हें किसी ने भी कभी अपनी बात कहने से नहीं रोका। पार्टी में अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में वफादारी के मूल्यांकन का दायरा बहुत सीमित हो गया है। बावजूद इसके राजनीति में नुकसान-फायदे की परवाह किए बिना वे अपनी प्रतिबद्धता में कमी नहीं होने देना चाहते।
हाल के दिनों में पार्टी में किसी न किसी रूप में अपने विरोधियों के हमले झेल रहे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि उनका विरोध और आगे आने से रोकने की कार्रवाई तो उसी समय से शुरू हो गई थी, जब इलाहाबाद स्थित आनंद भवन में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इंदिरा जी से उनकी मुलाकात कराई थी। ध्यान रहे कि अर्जुन सिंह की इन बातों का इस समय ज्यादा महत्व इसलिए है, क्योंकि बीते दिनों उन्होंने पार्टी के युवा सांसद व आलाकमान सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए उछाला था। जिस पर पार्टी की एक प्रवक्ता ने बिना किसी का नाम लिए कहा था, 'सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री चापलूसी नहीं पसंद करते और प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली नहीं है'।
अर्जुन सिंह ने वरिष्ठ पत्रकार डा. कन्हैया लाल नंदन के संपादकत्व में खुद पर लिखी गई पुस्तक 'मोहिं कहां विश्राम' के राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की ओर से विमोचन के मौके पर अपने इस दर्द का इजहार किया। सिंह ने कहा कि 1975 में इंदिरा जी के आपातकाल के फैसले के वे कायल नहीं थे। उन्हें उस समय मंत्रिमंडल में भी नहीं लिया गया। फिर भी उन्हें उस समय भी कभी अपनी बात कहने से नहीं रोका गया, बल्कि संजय गांधी तक ने उन्हें समर्थन दिया। उन्होंने कहा, 'आज वफादारी के मूल्यांकन का दायरा बहुत सीमित हो गया है। फिर भी नेहरू-गांधी परिवार में वफादारों और दिखावा करने वालों को पहचानने की असीम क्षमता है'।
इन स्थितियों के बाद भी उन्होंने अपने अगले रुख का संकेत दिया। राजनीति में नफा-नुकसान की परवाह किए बिना मौजूदा दौर में भी वे अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहना चाहते हैं। जिस विश्वास ने हिम्मत दी है-उसे बनाए रखना ही जीवन का लक्ष्य है। उन्होंने खुद को इस बुलंदी तक पहुंचने का श्रेय अपनी पत्नी को दिया। अपने पूरे भाषण में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, आलाकमान सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम तक नहीं लिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे, लेकिन वे कुछ नहीं बोले। सूत्रों के मुताबिक उनके कार्यालय से उनका गला खराब होने की बात कही गई थी। बाद में संदेश पढ़ने की बात आई तो उसे मना कर दिया गया। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने भी सिंह का संवेदनशील राजनेता बताया।