
नई दिल्ली। महंगाई काबू करने में नाकाम रहने और भारत-अमेरिकी परमाणु समझौते को क्रियान्वित करने के प्रयास के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टियां संप्रग सरकार को संभवत: शीघ्र ही नई चेतावनी देने वाली हैं।
भाकपा महासचिव एबी बर्धन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि महंगाई नियंत्रित करने में सरकार की असफलता और परमाणु समझौते पर उसके रुख पर वामदल गंभीर रवैया अपनाने वाले हैं। वामदलों की 23 मई को बैठक होने जा रही है। इसमें इन दोनों मुद्दों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस बैठक के पांच दिन बाद परमाणु मुद्दे पर संप्रग वाम समिति की बैठक तय है।
बर्धन ने कहा कि पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संप्रग सरकार के प्रति वाम दलों के रवैये पर चर्चा की गई। इसमें भी मंहगाई और परमाणु समझौते पर खास चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जनता के कई वर्ग और वाम दलों के समर्थक भी सवाल उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि क्या उस सरकार को समर्थन देना ठीक है जो उनकी राय को खास अहमियत नहीं देती। बर्धन ने कहा कि इसलिए हम इस दिशा में बहुत गंभीरता से सोच रहे हैं। 23 मई की बैठक में पार्टी की इस भावना को अन्य वाम दलों के बीच रखा जाएगा।
बार-बार किए गए इस सवाल पर कि क्या वाम दल सरकार से समर्थन वापस लेने की फिर चेतावनी देने जा रहे हैं।
भाकपा महासचिव ने कहा कि हम पर जनता और वाम समर्थकों का दबाव है। वे सरकार को बाहर से समर्थन देने के हमारे फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। वाम दल इस पर चर्चा करेंगे और देखेंगे कि क्या किया जा सकता है। वाम दल इस बारे में बढ़ते दबाव पर चर्चा करेंगे।
भारत-अमेरिकी परमाणु करार के वाम विरोध को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ने के कई तरह के प्रयास में जुटी है। परमाणु करार की पैरवी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की दलील का हवाला दे रहे हैं। बर्धन ने कहा कि कलाम और उनके विवेक का हम बहुत आदर करते हैं। लेकिन जिस तरह उनकी दलील है, उसी तरह कुछ अन्य विवेकपूर्ण लोगों की अलग राय है कि हमें इस करार पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।