नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विज्ञान व तकनीकी में उच्चस्तरीय शोध कार्यो को बढ़ावा देने के लिए देश में विज्ञान व इंजीनियरिंग शोध बोर्ड [एसईआरबी] के गठन का फैसला किया गया है। बोर्ड विज्ञान के क्षेत्र में बेहद बुनियादी शोध कार्यो से लेकर उच्च स्तर पर होने वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने का काम करेगा।
शोध कार्यो के चयन और आवश्यक ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह बोर्ड पूरी तरह से एक स्वतंत्र निकाय के तौर पर काम करेगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को यहां केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक में यह फैसला हुआ।
वित्तमंत्री चिदंबरम ने बताया कि एसईआरबी की अध्यक्षता विज्ञान व तकनीकी विभाग के सचिव करेंगे। इसे नीतिगत मामलों में सुझाव देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक की अध्यक्षता में एक अन्य समिति बनाई जाएगी। बोर्ड 75 करोड़ रुपये तक के शोध कार्यो को मंजूरी दे सकता है। यह मंजूरी विज्ञान व तकनीकी मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद दी जाएगी।ं सरकार पूर्व में कई बार इस बात पर चिंता जता चुकी है कि देश में न केवल विज्ञान क्षेत्र में शोध कार्यो में कमी आई है, बल्कि विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों की रुचि भी घटती जा रही है। दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर विज्ञान की जरूरतें बदलती जा रही हैं। बोर्ड की स्थापना सदन में कानून बना कर की जाएगी। इसके लिए आवश्यक विधेयक का प्रारूप संसद के अगले सत्र में पेश किया जा सकता है।
कैबिनेट ने देश के प्रमुख 21 क्षेत्रों में प्रशिक्षित व कुशल श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष निगम स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इसके तहत सरकारी व निजी क्षेत्र के सहयोग से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम [एनएसडीसी] का गठन होगा। जिन क्षेत्रों के लिए कुशल कार्मिक तैयार किए जाएंगे उनके नाम हैं आटोमोबाइल व आटो कंपोनेंट्स, बैंकिंग व बीमा, बिल्डिंग, रसायन, शिक्षा, इलेक्ट्रानिक्स हार्डवेयर, खाद्य प्रसंस्करण, फर्नीचर व फर्निशिंग, हेल्थ केअर, बीपीओ, साफ्टवेयर सर्विसेज, चमड़ा, मीडिया, संगठित रिटेल, पर्यटन, रियल एस्टेट आदि। बताते चलें कि मूलत: यह प्रस्ताव योजना आयोग की तरफ से आया हुआ है। चिदंबरम ने बताया कि ंिवभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के वास्ते आवश्यक कुशल कामगार उपलब्ध कराने के लिए जो सरकारी विभाग लगे हुए हैं, वह काम भी जारी रहेगा। हालांकि एनएसडीसी मुख्य तौर पर निजी क्षेत्रों के लिए यह काम करेगा। शुरुआत में इस अभियान को एक हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसे बाद में बढ़ाकर 15 हजार करोड़ रुपये कर दिया जाएगा।